परिचय
"You Were Born Rich" बुक समरी में हम 'हमारी पैसे के प्रति मानसिकता, कितना पैसा पर्याप्त होगा, विचारों को महत्व देना, कंपन और आकर्षण का नियम और जोखिम उठाने के बारे में जानेंगे।
लेखक Bob Proctor द्वारा लिखित "You Were Born Rich" बुक हमें मानसिक रूप से अमीर बनने की ओर ले जाती है। यह बुक बताती है सफलता बाहरी परिस्थितियों से अधिक आंतरिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है, सफल होने के लिए हमें अपने विचारों के साम्राज्य को समझना जरुरी है। और, यह बुक हमें दोहराव के द्वारा अपने कार्यों को बेहतर करना भी सिखाती है।
विचार न दिखने वाली चीज आवश्यक है लेकिन उनके दोहराव से हम प्रतिदिन धीरे-धीरे उन विचारों को अपने जीवन में फॉलो करने लगते है, यह हमें पता ही नहीं चलता है।
हमारी पैसे के प्रति मानसिकता
धन हमारे जीवन पर किसी भी अन्य वस्तु की तुलना में अधिक प्रभाव डालता हैं। इसलिए, हमें इस बात को मानना होगा कि हर किसी को इस बात की समझ होनी चाहिए कि धन क्या है, और कैसे इसके आकर्षण को नियंत्रित किया जाता हैं।
पैसे के बारे में तीन बातें जो हमें जाननी चाहिए, जो इस प्रकार है;
1-पैसा महत्वपूर्ण है।
"पैसा ही सबकुछ नहीं है।" या "पैसा महत्वपूर्ण नहीं है।" या "मुझे पैसे की परवाह नहीं है।" जो लोग ये बातें कहते हैं, शायद उन्हें पैसे की परवाह न हो, लेकिन हमारे बैंकर, कार डीलर और मार्केटर को पैसे की परवाह होती हैं।
और सभ्य समाज में रहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए पैसा महत्वपूर्ण है। इसलिए, यह तर्क देना कि यह महत्वपूर्ण नहीं है। यह बेतुका लगता है। क्योंकि जिस क्षेत्र में इसका उपयोग किया जाता है, उसमें कोई भी चीज पैसे की जगह नहीं ले सकती।
2-पैसा एक सेवक है।
हमेशा याद रखें, पैसा एक नौकर है; हम मालिक। और इसे उलटने की कोशिश न करें, क्योंकि उच्च बुद्धि वाले कई लोग पहले ही ऐसा कर चुके हैं, जिससे उन्हें बहुत नुकसान हुआ है।
3-धन को हमेशा बहते रहने दे नाकि उसे रोक कर रखें।
पैसे के बारे में हमें जो तीसरी बात जाननी चाहिए, वह यह है कि यह तभी तक मूल्यवान है जब तक इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। एक बार जब इसे प्रचलन से बाहर कर दिया जाता है, तो यह बेकार हो जाता है।
कितना पैसा पर्याप्त होगा
अधिकांश लोग सोचते हैं कि उन्हें जितना पैसा चाहिए, उससे कहीं अधिक चाहिए होता है, लेकिन बाद में वे उससे बहुत कम पर ही संतुष्ट हो जाते हैं, जो उन्हें मिल सकता है।
यह याद रखें कि सोचना, अपने आप में, पर्याप्त नहीं है - हमें कार्य करना होगा। कुछ चीजें हैं जो हमें करनी चाहिए जिनमें से एक यह तय करना है कि 'हमें कितना पैसा चाहिए।'
हम अपने अवचेतन मन के साथ काम कर रहे हैं और अवचेतन मन सोचता नहीं है। यह बार-बार दोहराये गये विचारों को स्वीकार करता है और फिर उन्हें आकार में बदल देता है। इसलिए हमारे लिए यह कहना कि 'मुझे बहुत सारा पैसा चाहिए' पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कोई भी नहीं जानता कि बहुत सारा कितना होता है।
अगर हम अपनी बेसिक जरूरतों को पूरा करते हुए भी अपनी इनकम से कुछ पैसा बचा लेते है, जो हमें बुरे वक्त से निपटने में मदद करता है। यह कुछ लोगों के लिए पर्याप्त हो सकता है और कुछ लोग पैसे कमाने में पर्याप्त नहीं खोज पाते है।
जो लोग पर्याप्त से दूर रहते है वे अंत में पैसा को बहुत कमा लेते है पर सुख, शांति और व्यक्तिगत रिश्ते उनके साथ नहीं होते है। इसलिए अपने लिए पर्याप्त खोजना जरुरी है।
विचारों को महत्व देना
हम में से अधिकांश लोग यह सोचते है कि हमारा कार्य अधिक मायने रखता है और यह कुछ हद तक सही भी है। पर हम यह सोचना भूल जाते है कि हमारी भावनाएं और विचार भी मायने रखते है। विचार और भावनाएं क्षणिक और किसी को दिखाई नहीं देती पर इसका प्रभाव भी हमारे कार्य होता जिससे कार्य के परिणाम ही पूरी तरह बदल जाते है।
हम सभी कुछ न कुछ चीजों की मांग करते है जैसे अपनी सैलरी बढ़ाना, अपना बिज़नेस ग्रो करना और अपनी पैसिव इनकम के सोर्स बढ़ाना आदि।
जब हमारा बार-बार असफलता से सामना होता है। तब हम गहराई में उतरकर, इसका जवाब ढूढ़ते है तो हमें पता चलता है कि विचारों के स्तर पर हम जैसा सोचते थे, हमारा अवचेतन मन उसी प्रकार के विचारों को आकर्षित कर रहा था।
विचारों के महत्व को समझने और उपयोग करने से हमारे द्वारा निर्धारित पैसो के आकड़ो तक पहुंचना आसान हो जाता है। क्योंकि विचारों के स्तर पर अपने आकड़ो तक पहुंचने का बार-बार सोचना, हमें धीरे-धीरे कार्य की ओर बढ़ा सकता है।
यह भी याद रखें कि हमारे विचार हमेशा उस कार्य की ओर नहीं ले जा सकते जो हम करना चाहते है। कुछ समय हमें स्वयं भी प्रयास करना और बोरियत के बाद भी अपने कार्य पर टिके रहना होता है। तब कहीं जाकर हम अपने विचारों से सफलता को मूर्त रूप में बदल देंगे।
कंपन और आकर्षण का नियम
हम अपने भविष्य का निर्माण, विचारों से करते हैं। विचार भाग्य का दूसरा नाम है; इसलिए अपने लिए बेहतर विचार चुनें और प्रतीक्षा करें, क्योंकि प्रेम से प्रेम बढ़ता है और घृणा-से-घृणा।
कंपन के नियम के अनुसार, हम मानते हैं कि हर चीज़ कंपन करती है या लगातार धूमती रहती है; कोई भी चीज़ रुकी हुई नहीं है। इसलिए, "जड़ता" या विश्राम की अवस्था जैसी कोई चीज़ नहीं है।
कंपन का नियम मन और पदार्थ के बीच, भौतिक और अभौतिक दुनिया के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।
जो लोग अपने विचारों में सकारात्मक होते हैं, वे हमेशा जीवन के उज्जवल पक्ष को देखते हैं। अपने चेहरे को धूप की ओर मोड़कर, वे बुरे में भी अच्छाई देखने का प्रयास करते हैं। वे एक "सकारात्मक कंपन" में होते हैं, और इसलिए अन्य सकारात्मक व्यक्तित्वों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
दूसरी ओर, नकारात्मक व्यक्तित्व आदतन बुरे और नकारात्मकता पर ध्यान देते हैं। वे इसके बारे में सोचते हैं, इसका अनुमान लगाते हैं, इसकी उम्मीद करते हैं, और हमेशा वही पाते हैं जिसकी उन्हें तलाश थी। जिस नकारात्मक कंपन में वे खुद को रखते हैं, उसके कारण वे निश्चित रूप से अन्य दुखी व्यक्तित्वों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
हमारे पास स्वतंत्र इच्छा है। हम चुन सकते हैं कि हम इन दो व्यक्तित्व प्रकारों में से कौन सा अपनाना चाहते हैं। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति लगातार नकारात्मक रहता है, लेकिन उस स्थिति से थक गया है, तो वह व्यक्ति जागरूकता और उचित प्रयास के माध्यम से खुद को सकारात्मक व्यक्तित्व वाले व्यक्ति में बदल सकता है।
जोखिम उठाना
हमें कभी भी 'अपनी वर्तमान नौकरी को बनाए रखने', या 'अपने वर्तमान जीवन स्तर को बनाए रखने' जैसे मुद्दों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय, हम उन चीज़ों पर विचार कर सकते है जो 'गलत हो सकती हैं', जिसके हम उन चीज़ों को हमले के लिए तैयार रखेंगे जो 'सही होनी चाहिए'।
आज से, हम एक जोखिम लेने वाले व्यक्ति बनने का संकल्प कर सकते हैं, जिनकी नज़र हमेशा हमारी कमज़ोरियों और देनदारियों की बजाय हमारी ताकत और संपत्तियों पर होती है।
एक जोखिम लेने वाला व्यक्ति सुबह उठते ही केवल 'उन चीज़ों को करने के तरीके' के बारे में सोचता है, जो उसे करना चाहिए, बजाय इसके कि वह 'उन सभी कारणों के बारे में सोचें जिनकी वजह से वह उन चीज़ों को नहीं कर सकता हैं।'
निष्कर्ष
You Were Born Rich बुक समरी में हमने पांच महत्वपूर्ण बातों के बारे में जाना जो इस प्रकार है;
- पैसा दो प्रकार से बनता है; एक स्वयं के उपयोग से और दूसरा पैसे के उपयोग से।
- पैसे की, ज्ञान की तरह, कोई सीमा नहीं है हमें स्वयं अपनी सीमा बनानी होगी।
- हम जैसा सोचते है जाने अनजाने में वैसे ही कार्य करते है।
- जो चीज जितनी बार दोहराई जाएगी वह उतनी ही अधिक शक्तिशाली होगी।
- सफलता के लिए समझकर जोखिम उठाना जरुरी है।