परिचय
"द बिग बुल ऑफ़ दलाल स्ट्रीट" बुक हमें यह संदेश देती है कि 'हर सच्चा सफल व्यक्ति बाकी लोगों से यह उम्मीद करता है कि वे उनकी बेहतर कार्यों की नक़ल करें, और उनकी गलतियों को दोहराये नहीं, और लगातार आगे बढ़ते रहे।'
लेखक Aditya Kondawar, Aprajita Sharma, and Neil Borate द्वारा लिखित "The Big Bull of Dalal Street" बुक राकेश झुनझुनवाला के जीवन पर प्रकाश डालती है। इस बुक में हम एक निवेशक और ट्रेडर के सोचने के तरीके, रिस्क को मैनेजमेंट और सफलता के लिए लंबे समय तक टिके रहना सीखेंगे। यह बुक हर उस व्यक्ति के लिए सफलता की राह आसान बनाती है जो स्टॉक मार्केट में सफल होना चाहता है।
राकेशजी की निवेश सोच
निवेश में सभी का अपना-अपना सोचने का तरीका होता है जिसके बदौलत हम मार्केट से पैसा बनाते है, जैसे कोई लंबे समय को ध्यान में रखकर निवेश करता है और कम्पाउंडिंग का लाभ उठाता है। वही कुछ लोग शार्ट-टर्म में भी बहुत अच्छा रिटर्न्स पा लेते है।
कंपनी की जांच करते समय राकेश, चार चीजों पर अधिक ध्यान देते थे जो इस प्रकार है;
1-अवसर तलाश करना। रिटेल में सबसे ज्यादा अवसर मिलते है, क्योंकि यहां मांग स्वाभाविक रूप से मौजूद होती है, और वे यहां निवेश करना पसंद करते थे।
2-प्रतियोगिता लाभ। राकेश कंपनी की प्रतियोगी क्षमता में शून्य ढूंढने का प्रयास करते है, और यह भी देखते है कि कंपनी के पास उपलब्ध अवसरों के संबंध में उसके पास क्या है।
3-निवेश के लिए स्मॉल कैप का चयन। हमें स्मॉल कैप कंपनियों में पैसा लगाना चाहिए जो बाद में लार्ज कैप बन सकती है। राकेश ने, टाइटन पर, उस समय निवेश किया था जब यह 500 करोड़ की कंपनी थी, आज यह 11000 करोड़ की है।
4-तरलता (Liquidity)। हमारे पास किसी कंपनी के बकाया शेयर्स का 5-10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा नहीं होना चाहिए। क्योंकि इसे बाद में, पैसे में बदलना बहुत मुश्किल हो सकता है।
राकेश एक ऐसे व्यक्ति थे जो पहले खरीदो और बाद में जांच करो जैसी रणनीति अपनाते थे। खरीदते समय अपनी पोजीशन को छोटी रखते थे। जब कंपनी की रीसर्च पूरी हो जाने के बाद ही, अपनी पोजीशन बढ़ाने या घटाने के बारे में सोचते थे।
धैर्य और दूर की सोच
इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि ज्यादातर लोग जल्दी अमीर बनने की चाह लेकर स्टॉक मार्केट में आते हैं। वे यहां निवेश नहीं, ट्रेडिंग करते हैं यही झोल है। राकेश झुनझुनवाला ने केवल ट्रेडिंग से अपना भविष्य नहीं बनाया। भले ही उन्होंने अपनी शुरुआती दिनों में ट्रेडिंग से पैसा कमाया है लेकिन असली संपत्ति निवेश से बनी।
ट्रेडिंग के गुण सीखना आसान नहीं होता लेकिन निवेश को समझना अधिक आसान है। निवेश का पहला नियम है धैर्य रखो और दूर की सोचो, यानी लंबे समय के लिए निवेश करो। अगर कोई शेयर्स को केवल खरीदने और बेचने के बारे में ही सोचता है तो वह अच्छा निवेशक नहीं हो सकता।
जब तक प्रॉफिट मिल रहा है तब तक धीरज बनाए रखें। लोग फूल बेचना चाहते हैं और खरपतवार को पानी देते हैं। लोग अपने प्रॉफिटेबल निवेश को बेचना चाहते हैं लेकिन नुकसान पहुंचाने वाले शेयर्स को अपने पास रखते हैं। जो उन्हें और अधिक नुकसान की ओर ले जाते है।
राकेश ने भी ट्रेडिंग से पैसा बनाया है लेकिन ट्रेडिंग से होने वाले प्रॉफिट को उन्होंने निवेश करके ही कई गुना किया है, न कि वापस ट्रेडिंग में लगाकर गवाया है। एक ट्रेडर भी दूर की सोच रखता है तभी वह ट्रेडिंग में सफल हो सकता है।
संभलकर ट्रेडिंग जोखिम लेना
राकेश ने शेयर बाजार के अपने शुरुआती दिनों में ट्रेडिंग के जरिए ही पैसे का निर्माण किया था। उन्होंने पारिवारिक पूंजी का उपयोग नहीं किया। इसलिए उनके पास शेयर्स पर बड़े दाव खेलने के लिए ट्रेडिंग लेवरेज के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
राकेश ने अपने लिए एक नियम तय किया था। वह था, 'सिर सलामत, तो पगड़ी हज़ार।' इसका मतलब यह है कि अपने जीवन की रक्षा के लिए छोटी-मोटी उपलब्धियों का त्याग कर देना चाहिए।
वे ट्रेडिंग में चली गई चाल से कभी भावनात्मक मोह नहीं रखते थे। यदि ट्रेडिंग का कोई कदम गलत लगता था, तो वे उस नुकसान को स्वीकार करते थे और उसी दिन उस ट्रेडिंग को खत्म कर देते थे।
राकेश के पास इतना पैसा था कि वह अपनी नुकसान पहुंचाने वाली चालो को भी लंबे समय तक रखकर, उनके फायदे में बदलने का इंतजार कर सकते थे। लेकिन वे हालत पलटने का इंतजार करने के बजाय, तुरंत इससे बाहर आने का फैसला कर लेते थे।
इसके ठीक उल्टा, ज्यादातर लोग नुकसान के दौरान और अधिक लेवरेज लेते हैं, यह बड़ी गलती है, जिसे हमें ट्रेडिंग से पैसे बनाने के लिए बदलने की जरूरत है।
राकेश के निवेश मंत्र
शेयर बाजार में निवेश करना सिखाया नहीं जा सकता। इसे खुद ही सीखना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि राकेश ने कभी शेयर्स चुनने का तरीका किसी को नहीं बताया। असल बात यह है कि उसमें से हम कितना निचोड़ निकाल सकते है।
राकेश के अनुसार मल्टीबैगर स्टॉक को चुनते समय पांच पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए, जो इस प्रकार है;
- दिमाग खुला रखें। अपने आसपास के माहौल पर ध्यान दें। शेयर बाजार से जुड़े कुछ शानदार विचार अचानक आ जाते हैं जब हम उनकी उम्मीद भी नहीं कर रहे होते।
- बाजार के अवसर का आकलन करना। यह देखने की कोशिश करें कि कोई कंपनी अपने बाजार का, आकार बड़ा होने के बाद, कितने बड़े अवसर की उम्मीद कर रही है।
- कंपनी का मैनेजमेंट। कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर्स और अन्य सहयोगियों के साथ संबंध कैसा है? और पैसों को लेकर वे किस तरह सोचते है? क्या वे व्यापार को कम खर्चे में चला रहे हैं इन सारे तथ्यों को जानना जरुरी है।
- प्रतियोगी क्षमता। कंपनी अपने प्रतिद्वंदियों की तुलना में बेहतर होनी चाहिए। चाहे यह ब्रांड की बात हो, तकनीक या पूंजी की।
- मूल्यांकन। गलत कीमत पर खरीदे गए बड़ी कंपनी के शेयर भी मुनाफे को प्रभावित कर सकते है। ऐसे में कीमत बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए हमें कंपनी का मूल्यांकन करना सीखना होगा।
राकेश से क्या नहीं सीखे
राकेश ने शेयर बाजार में चल रही धुन का बहुत मजा लिया है। और निवेश की दुनिया में बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचे है। हर सफल व्यक्ति का अपना सोचने का तरीका होता है, यह तरीका हर किसी की मानसिकता में फिट बैठता हो यह जरुरी तो नहीं है।
अब हम कुछ ऐसी बातों के बारे में जानेंगे जो हमें राकेश से समझकर सीखनी चाहिए जो इस प्रकार है;
1-उधार के पैसों से ट्रेडिंग।
राकेश शेयर बाजार में निवेश करने के लिए पैसे उधार लेते थे जिससे वे बड़े मुनाफे के लिए बड़ी पोजीशंस ले सके। वे अपने ऋण को संभाल लेते थे लेकिन दूसरे लोगों को कभी भी यह तरीका अपनाने की सलाह नहीं देते थे।
2-एकाग्रता स्टॉक पर।
राकेश शेयर बाजार की बियर या बुल स्थिति की परवाह न करते हुए पूरी तरह इक्विटी में निवेश करते रहे। राकेश ने भले ही खुद विभिन्न categories में निवेश का सिद्धांत नहीं अपनाया लेकिन वे रिटेल निवेशकों को इसे अपनाने पर जोर देते थे।
3-स्मॉल कैप का भेदभाव।
राकेश बताते है कि इस श्रेणी में अच्छी कंपनियों को तलाश करना आसान काम नहीं है। यह काम फंड मैनेजर पर छोड़ देना चाहिए। अगर खुद निवेश करना है तो स्मॉल कैप शेयर्स चुनने के बजाय स्माल कैप म्युचुअल फंड में निवेश करना ज्यादा आसान होगा।
4-सेहत को हल्के में लेना।
अगर हम बड़े निवेशक बनना चाहते हैं तो अपनी सेहत की ओर ध्यान देना होगा। जिंदा रहने का लक्ष्य साधना होगा, ताकि हम कंपाउंडिंग की मदद से अपना आर्थिक लक्ष्य पूरा कर सकें।
निष्कर्ष
"द बिग बुल ऑफ़ दलाल स्ट्रीट" बुक समरी में हमने इन बातों के बारे में जाना, जो इस प्रकार है;
- राकेश हमेशा भारतीय स्टॉक मार्केट के प्रति आशावाद की भावना अपनाते थे।
- निवेश हो या ट्रेडिंग, प्रॉफिट लंबे समय में ही दिखाई देता है।
- ट्रेडिंग में अपने लॉस को मैनेज करने से हम लंबे समय तक टिके रह सकते है।
- बेहतर स्टॉक चुनने के लिए बाजार अवसरों को समझना।
- हमें उधार को कम करने और अपनी सेहत पर ध्यान देना होगा।
बुक कोट्स
"एक्सचेंज में रहकर काम करने का कोई फायदा नहीं होता, असली फायदा तो ट्रेडिंग का ज्ञान रखने वालों को मिलता है।"
"डिविडेंट यील्ड वह संख्या है, जो शेयर द्वारा दिए गए डिविडेंड को शेयर के दाम से घटाने पर मिलती है। यह संख्या जितनी ज्यादा होगी, निवेश से लगातार मिलने वाला रिटर्न्स उतना ही ज्यादा होगा।"
"निवेश उन क्षेत्रों में करना चाहिए, जिनका साथ बाजार नहीं देता।"
"जिस क्षेत्र में कोई अनुभव न हो, वहाँ कदम नहीं बढ़ाने चाहिए।"
"यदि जनता का धन और शेयर बाजार नहीं होता, तो मुकेश अंबानी और रतन टाटा आज वैसे नहीं होते, जैसे वे हैं।"
"आज ख़रीदा गया सबसे ख़तरे वाला शेयर भी हमें सबसे ज्यादा मुनाफ़ा दे सकता है। बशर्ते हमारे भीतर ख़तरे उठाने की भूख हो, धीरज हो, अपना खुद का पैसा हो, उधार का नहीं।"
"अगर आप ट्रेड करना चाहते है, तो इसे निवेश के साथ मत मिलाइए।"
"उधार की रकम से ट्रेडिंग करना असल में सिगरेट और शराब पीने की तरह है। अगर नपे-तुले ढंग से किया जाए, तो इनसे मजा मिलता है, ज्यादा हो जाए, तो समस्या है।"