The Warren Buffett Way बुक समरी में हम दुनिया के सबसे बड़े निवेशक, बिज़नेस ख़रीदना, पोर्टफोलियो मैनेज करना, निवेश के मनोविज्ञान को समझना, और धैर्य के मूल्य को समझने का प्रयास करेंगे।
लेखक Robert G. Hagstron द्वारा लिखित The Way of Warren Buffett Third Edition बुक के माध्यम से वारेन बफेट के सिद्धांतो और निवेश रहस्यों को उजागर करने का प्रयास किया। यह बुक हमें बताती है कि कैसे एक ग्रेट निवेशक अपने लिए निवेश का चुनाव करता है और धैर्य के साथ अपने निवेश निर्णयों के साथ बना रहता है, तब कहीं जाकर वह अंत में भारी दौलत बनाता है।
निवेश करना एक बात है और अपनी निवेश निर्णयों पर टिके रहना एक और बात हैं। अधिकांश लोग निवेश करना तो सीख जाते है पर निवेश के साथ बने रहना नहीं सीख पाते है। यहीं हमें भारी दौलत से दूर रखता है।
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The Warren Buffett Way Book Summary Hindi |
दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक
दुनिया के सबसे बड़े निवेशक में जो विशेषता होनी चाहिए, वह सभी बफेट में मौजूद है जैसे छोटी उम्र से निवेश करना, अपनी निवेश गलतियों से सीखना, अपने लिए बेहतर लक्ष्य बनाना और उन्हें साकार करने के लिए मेहनत करना आदि।
बफेट ने अपने लिए एक कठिन लक्ष्य निर्धारित किया और उसे पूरा भी किया: Dow Jones Industrial Average को प्रति वर्ष 10% अंकों से मात देना। उन्होंने इससे कहीं बेहतर किया: 1965 और 1969 के बीच, बफेट ने 29.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाया, जो Dow से 22% अधिक था।
लेखक के अनुसार बफेट को तीन चीजें बेस्ट निवेशक बनने की ओर ले जाती है जो इस प्रकार है;
- व्यावहारिक लाभ (Behavioral Advantage); व्यावहारिक लाभ का मतलब अपने स्वभाव से या तर्क करने की क्षमता से, या अपने कार्य को अलग-अलग दिशा से देखने से है।
- विश्लेषणात्मक लाभ (Analytical Advantage); किसी कंपनी में निवेश करते समय बिज़नेस ओनर की तरह सोचना।
- संगठनात्मक लाभ (Organizational Advantage); बर्कशायर हैथवे की सफलता का राज बफेट द्वारा बनाया गया सिस्टम है। जो उसकी वैल्यू को और अधिक बढ़ा देता हैं।
एक बिजनेस खरीदना
बफेट निवेश करते समय बिज़नेस पर ध्यान केंद्रित करते है, ना कि मार्किट पोजीशन और ट्रेडिंग डाटा पर। बफेट का मानना है कि हम किसी कंपनी के शेयर्स खरीदने के बाद उस कंपनी के पार्टनर बन जाते है।
उस कंपनी के प्रॉफिट-लॉस में बराबर की भागीदारी रखने लगते है इसलिए हमें किसी कंपनी को खरीदते समय कुछ प्रश्नों के जबाब अपने से और उस कंपनी से पूछने होंगे ताकि हम एक बेहतर बिज़नेस खरीद सकें।
वॉरेन बफेट के ये प्रश्न और सिद्धांत कुछ इस प्रकार है;
बिज़नेस सिद्धांत
- क्या बिज़नेस सरल और समझने योग्य है?
- क्या बिज़नेस अपने इतिहास में बेहतर करता रहा है?
- क्या बिज़नेस की दीर्घकालिक संभावनाएं अनुकूल हैं?
मैनेजमेंट सिद्धांत
- मैनेजमेंट अपनी अर्निंग के साथ क्या करती है?
- क्या मैनेजमेंट अपनी गलतियों को शेयरधारकों के सामने रखती है या नहीं?
- क्या मैनेजमेंट अपने नियमों और लक्ष्यों को फॉलो करता है या बदलता रहता है?
फाइनेंसियल सिद्धांत
- प्रति शेयर आय पर नहीं, बल्कि रिटर्न ऑन इक्विटी पर ध्यान दें।
- "कंपनी मालिक की कमाई" को कैलकुलेट करें।
- हाई प्रॉफिट मार्जिन वाली कंपनियों की तलाश करें।
- रखे गए प्रत्येक डॉलर के लिए, यह सुनिश्चित करें कि कंपनी ने कम से कम एक डॉलर का बाजार मूल्य बनाया है।
मार्केट सिद्धांत
- बिज़नेस का मूल्य क्या है?
- क्या बिज़नेस को उसके मूल्य से महत्वपूर्ण छूट पर खरीदा जा सकता है?
अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करना
निवेश करने के साथ हमें अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करना भी जरुरी हो जाता हैं। क्योंकि प्रॉफिट मार्किट में सही समय पर निवेश लेने और धैर्य के साथ इंतजार करने से बनता है। और किसी पोर्टफोलियो को मैनेज करने के लिए हमें अपने निवेश और निवेश करने के कारणों के बारे में पता होना जरुरी हैं।
आज के समय में तीन प्रकार की इन्वेस्टिंग के लिए पोर्टफोलियो मैनेज करना होता है। यह निवेश रणनीतियां कुछ इस प्रकार है;
- Active Investing; एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजर अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने के लिए एक्टिव होकर कार्य करते है। जिसमें लॉस होने पर एग्जिट करना, और प्रॉफिट होने पर चलने देना शामिल है। इसमें अधिक खरीदने और बेचने के कारण चार्जेज अधिक हो जाते हैं।
- Index Investing; यह निवेश खरीदो और होल्ड करो के सिद्धांत पर कार्य करता है, और इसमें passively अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करना होता है। यह निवेश उन लोगो के लिए है जो निवेश के बारे में कम जानते है।
- Focus Investing; जो लोग मार्केट को समझते है, और मार्केट को समय दे सकते है, उनके लिए फोकस निवेश एक बेस्ट विकल्प हो सकता है। इसमें हम अपने पोर्टफोलियो को 10-15 बेहतर कंपनियों से भरने का प्रयास करते है, जो हमें बेहतर रिटर्न्स दे सकती है।
निवेश मनोविज्ञान को जानना
अपने पैसे का निवेश करना एक अलग बात है और निवेश से पैसे बनाना एक अलग बात है। पैसा हमारी भावनाओं से जुड़ा होने के कारण, लॉस का प्रभाव हमारी मानसिकता पर भी पड़ता है। इसलिए हमें अपनी निवेश मानसिकता को समझना जरुरी हैं।
उदाहरण के लिए वारेन बफेट और उनकी बहन ने 11 वर्ष की उम्र में निवेश किया और लॉस झेला। उस लॉस से बफेट ने सीख ली और उनकी बहन ऐसा नहीं कर सकीं। यही मानसिकता का फर्क है, कुछ लोग लॉस को स्वीकार कर पाते है और कुछ नहीं।
लेखक हमें कुछ फाइनेंशियल बिहेवियर के बारे में बताते है जिनके बारे में हर निवेशक को जानना और समझना जरुरी हो जाता है;
- अति आत्मविश्वास के जोखिम से बचना।
- अति रिएक्टिव भावनाओं को मैनेज करना।
- नुकसान को स्वीकार करना, नाकि इससे बचने की कोशिश करना।
- हर पल अपने निवेश को देखते न रहें।
- कम समय में होने वाले नुकसान को देखकर अपना निवेश न छोड़े।
- दूसरों के कामों या निवेश नीतियों का आंख बंद करके फॉलो न करें।
- भावनात्मक जाल को मैनेज करें।
धैर्य के मूल्य को समझना
निवेशक और ट्रेडर्स दोनों के लिए समय सीमा मायने रखती हैं। एक निवेशक, निवेश कारण उसके अनुसार होने तक अपने निवेश में बना रहता है, और धैर्य के साथ निवेश कारण बदलने का इंतजार करता है। और अंत में, निवेश कारण बदलने पर उस निवेश को छोड़ देता है।
वही एक ट्रेडर, अपने ट्रेडिंग सेटअप का धैर्य के साथ इंतजार करता है, और सेटअप आने पर ट्रेड लेता है। और उसके बाद उसे टारगेट और स्टॉप लॉस हिट होने का भी धैर्य के साथ इंतजार करना होता है तब कहि जाकर वह प्रॉफिट या उस ट्रेड से सीख पाता हैं।
लेखक हमें लंबे समय के लिए निवेश करने और धैर्य के साथ इंतजार करने के अनेक फायदे बताते है, जो इस प्रकार है;
- शॉर्ट टर्म लॉस से बच जाते है, क्योंकि प्रॉफिट लॉन्ग टर्म में ही देखने को मिलता है।
- कम खरीदने और बेचने से टैक्स और चार्ज भी कम हो जाते है।
- भावनात्मक उतार-चढ़ाव का हमारे पोर्टफोलियो पर अधिक प्रभाव नहीं होता।
- चक्रवर्ती ब्याज हमारे पैसे को बढ़ाने में मदद करता है।
समय और धैर्य, एक ही सिक्के के दो पहलू है। बफेट की सफलता उनकी कंपनी द्वारा ख़रीदे गये आम शेयरों और पोर्टफोलियो के साथ धैर्य के साथ लंबे समय तक बने रहने से है।
निष्कर्ष
The Warren Buffett Way बुक समरी में हमने पांच महत्वपूर्ण बातें को जाना, जो इस प्रकार है;
- वारन बफेट, क्यों दुनिया के सबसे बड़े निवेशक कहे जाते है।
- निवेश करते समय हमें बिज़नेस ख़रीदने की मानसिकता अपनानी होती है।
- हम जिस प्रकार के निवेश विकल्प चुनते है उसके अनुसार हमें अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करना सीखना होगा।
- निवेश करते समय हमें अपनी निवेश मानसिकता के बारे में पता होना चाहिए।
- निवेश, धैर्य के बिना हमें पैसे बनाकर नहीं दे सकता।