Know Yourself, Know Your Money बुक समरी में हम चार मनी क्लासरूम, धन संबंधी सात ट्रेंड्स, धन से उत्पन्न भय, खर्च के पीछे की मानसिकता, बचत के पीछे की मानसिकता और पैसे दान करने के पीछे की मानसिकता को समझने का प्रयास करेंगे।
लेखिका Rachel Cruze द्वारा लिखित Know Yourself, Know Your Money बुक हमें उन पहलुओं की ओर ले जाती है, जो हम नज़रअंदाज़ करते है। यह बुक बताती है कि अधिक मेहनत से प्राप्त फाइनेंसियल सफलता भी कुछ ही दिनों की मेहमान हो सकती है, अगर हम पैसे के मानसिकता और भावनात्मक पहलु को मैनेज नहीं करते है तो। इसलिए यह बुक हमें अपनी फाइनेंसियल मानसिकता में गहराई से उतरने पर जोर देती है।
फाइनेंशियल सफलता अधिकतर अपनी मेहनत पर नहीं बल्कि मानसिकता पर निर्भर करती है। इसिलए हमारे लिए पैसे बनाने से पहले अपनी मानसिकता पर काम करना जरुरी हो जाता है।
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Know Yourself Know Your Money Book Summary Hindi |
चार मनी क्लासरूम
जब हम अपने जीवन के पैसे के क्लासरूम को देखते हैं, तो हमें पता चलता हैं कि पैसे के बारे में हमने दो तरह से सीखा है: पहला हमारे माता-पिता भावनात्मक रूप से पैसे के बारे में क्या सोचते थे, और पैसे की परेशानियों पर किस प्रकार की भावनात्मक प्रक्रिया देते थे?
दूसरा जब पैसे के बारे में बात करने की बारी आती थी तब अपने माता-पिता मौखित रूप से पैसे के बारे में क्या बताते थे, किस प्रकार परिस्थितियों को छुपाने की कोशिश करते थे?
हम किसी चीज़ के बारे में मिलने वाली सकारात्मक या नकारात्मक भावनाओं के माध्यम से भावनात्मक संचार का अनुभव करते हैं, भले ही हम इसका सटीक कारण न बता पाएँ। जब भावनात्मक संचार सकारात्मक होता है, तो हम शांत महसूस करते हैं और जब यह नकारात्मक होता है, तो हम तनाव महसूस करते हैं।
यह चार मनी क्लासरूम कुछ इस प्रकार है;
- Anxious Classroom; यदि हम पैसों को लेकर चिंता या तनाव महसूस करते है, और पैसों के बारे में कभी या बहुत कम बात करना पसंद करते है, तो हम इसी क्लासरूम में पले-बढ़े हैं।
- Unstable Classroom; इस क्लासरूम में पैसे को लेकर अपने माता-पिता आपस में, बच्चों के साथ, परिवार के साथ, कभी-कभी अजनबियों के साथ भी बहस करते है।
- Unaware Classroom; अगर हम इस क्लासरूम में पले-बढ़े हैं, तो शायद हमें पैसे की चिंता नहीं रही होगी। क्योंकि वास्तव में हम नहीं जानते की पैसे कैसे काम करते है या हमारे माता-पिता द्वारा हमें नहीं बताया जाता है कि पैसे की क्या वैल्यू है।
- Secure Classrooms; यह क्लासरूम ऐसे घरों को दर्शाते हैं जहाँ माता-पिता स्वस्थ पैसे की आदतें अपनाते हैं। यहां पैसे से तनाव नहीं होता, क्योंकि माता-पिता जानते हैं कि इसे कैसे अच्छी तरह से मैनेज किया जाए।
धन संबंधी सात ट्रेंड्स
ध्यान रखें कि ये ट्रेंड इस बात पर निर्भर करती हैं कि हम पैसे से कैसे निपटते हैं, और उन्हें दूसरों के सामने कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन किसी भी ट्रेंड में होना सही या गलत नहीं है, इसे बस एक बेहतर सोच को अपनाने और पहचानने के रूप में लेने से, हम पैसे के प्रति बेहतर मानसिकता अपना सकते है।
पैसे की ट्रेंड्स कुछ इस प्रकार है;
- बचतकर्ता या खर्चकर्ता; बचत की मानसिकता होने पर हम पैसे बचाने के बारे में पहले सोचेंगे। वहीं खर्चकर्ता की मानसिकता होने पर, हम उस पैसे से क्या खरीद सकते है इसके बारे में पहले सोचेंगे।
- बेवकूफ या स्वतंत्र आत्मा; बेवकूफ़ अपनी चीजों को व्यवस्थित रखना पसंद करते है। वहीं मुक्त आत्माएं वाले लोग "चलो जीवन का आनंद लेते है" की मानसिकता वाले होते है।
- अनुभव या चीजें; अपने पैसे से कुछ लोग किसी भौतिक वस्तु की तुलना में एक बेहतर स्मृति बनाना ज्यादा पसंद करते है। वहीं कुछ लोग नए प्रोडक्ट पर पैसा खर्च करते है।
- गुणवत्ता या मात्रा; कुछ लोग गुणवत्ता वाली वस्तु पर पैसा खर्च करना पसंद करते हैं, जबकि अन्य ज्यादा मात्रा में मिलने वाली अनेकता का आनंद लेते हैं।
- सुरक्षा या स्थिति(status); सुरक्षा की मानसिकता वाले लोग पैसे के प्रति डर की भावना रखते है। "स्थिति वाले लोगों" के लिए, पैसा होना व्यक्तिगत उपलब्धि है।
- बहुतायत या कमी; जो लोग बहुतायत की ओर झुकाव रखते हैं, उनका मानना है कि हर किसी के लिए हमेशा पर्याप्त से अधिक पैसा होता है। कुछ लोगों की मानसिकता कमी वाली होती है। वे इस विश्वास के आधार पर पैसे के फैसले लेते हैं कि संसाधन सीमित हैं।
- Planned दान या Spontaneous दान; एक Spontaneous दाता, खुद को मदद करने से रोक नहीं पाता है। आम तौर पर, planned दाता अपने संसाधनों और धन को बहुत गंभीरता से लेते हैं, वे हर चीज के लिए दान नहीं करते है।
धन से उत्पन्न भय
हममें से हर एक को पैसे से जुड़े डर हैं या रहे हैं। वास्तव में, रिसर्च से पता चलता है कि पर्याप्त पैसा न होना उन दस चीजों में से एक है जिनसे इंसान सबसे ज़्यादा डरते हैं। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हमारे पास कितना पैसा है या हम कितना कमाते हैं, हर किसी को पैसों से जुड़े डर का अनुभव होता है।
इन पैसे से जुड़े डर को कम करने के लिए लेखक तीन स्टेप्स की एक रणनीति हमारे साथ साझा करते है जो इस प्रकार है;
- नाम देना; जब हम अपने डर को पहचान लेते हैं और नाम देते हैं, तो यह अब छाया में छिपकर हमारे व्यवहार को नियंत्रित नहीं कर सकता, बिना हमें पता चले।
- सच्चाई पर ध्यान केंद्रित करना; डर को स्वीकार कर, अपने डर की सच्चाई पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करे।
- मदद के लिए आगे बढ़ना; इसका मतलब है कि हम अपने डर के बारे में ईश्वर और दूसरों से सार्थक तरीके से जुड़ रहे और जहाँ भी ज़रूरत हो वहाँ दूसरों की मदद ले।
अब हम उन डरो को जान लेते है जिन पर हमें इस रणनीति का उपयोग करना है। वे डर कुछ इस प्रकार है;
- अगर मेरे साथ कुछ बुरा होता है तो मैं आर्थिक रूप से जीवित नहीं रह पाऊँगा।
- समय बीतता जा रहा है। मैं जो करना चाहता था, वह मैं नहीं कर पाऊंगा।
- मैं पैसे से नहीं जीत सकता, क्योंकि मैं बहुत होशियार नहीं हूँ।
- मैं सफल नहीं हो सकता, क्योंकि दुनिया इसी तरह काम करती है।
- मैं कभी भी आगे नहीं बढ़ पाऊँगा, क्योंकि मैंने पैसों के मामले में बहुत बड़ी ग़लतियाँ की हैं।
- मुझे डर है कि मेरा भी हाल मेरे माता-पिता जैसा हो जायेगा।
यह सभी वे डर है जो हमें धन के स्रोतों से दूर ले जाते है। और हम कड़ी मेहनत करने के बाद भी धन हासिल नहीं कर पाते है, लेकिन अब हमें पता है कि डरो पर काम करना है। तो क्यों-न डरों पर विजय की यात्रा शुरू की जाये।
खर्च के पीछे की मानसिकता
हम जो कपड़े खरीदते हैं, जिस कार को चलाना चाहते हैं, अपने घर में जो फर्नीचर रखते हैं, अपने बच्चों के लिए खिलौने रखते हैं, अपनी छुट्टियाँ मनाते हैं, यहाँ तक कि किराने की दुकान से मिलने वाला खाना और हम किस किराने की दुकान से खरीदारी करते हैं, इन सबके बारे में सोचें। हम जो खरीदते हैं, वह क्यों खरीदते हैं?
खर्च करने की भावनाएं इस प्रकार काम करती है। जब हम अपने जीवन से प्यार करते हैं, तो हम अपने और अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा क्या है, इसके आधार पर खरीदारी करते हैं। जब हम किसी और के जीवन से प्यार करते हैं, तो हम इस आधार पर खरीदारी करते हैं कि दूसरे क्या सोचेंगे।
अपने लिए पैसे खर्च करना स्वार्थी नहीं है। अपने लिए पैसे खर्च करने का मतलब है अपने उद्देश्य और मूल्यों के प्रति सच्चे रहना - जो हमें प्रेरित करते है, जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है, या हम दुनिया को क्या अनोखे उपहार दे सकते हैं।
दूसरों के लिए कोई वस्तु खरीदते समय थोड़ा इंतज़ार करें। इसका मतलब यह नहीं है कि हम उस वस्तु को कभी नहीं खरीद सकते। इसका मतलब यह है कि हमें पहले सही सोच रखनी होगी। जब इसके पीछे की प्रेरणा सही होगी, तो हम सबसे अच्छा खर्च करने का फैसला लेंगे।
बचत के पीछे की मानसिकता
जब हमें इस बात का अहसास होता है कि कर्ज से बाहर निकलने के लिए क्या करना होगा, तो हमें दो बातें पता होती है: पहली बचत न करना महंगा पड़ सकता है, और दूसरी अपने पैसों के लिए एक योजना बनाने की ज़रूरत।
लेकिन बचत न होना दूसरी समस्या की भी एक चेतावनी है कि हम अपने सपनों के प्रति सचेत नहीं हैं। ज़्यादातर लोग इस बारे में नहीं सोचते कि बचत और सपने देखने आपस में कितना गहरा संबंध रखते है। लेकिन अगर हम बचत नहीं कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हम अपने किसी भी सपने के लिए काम नहीं कर रहे हैं।
जब बचत की बात आती है, तो कुछ सपने देखने वालों को यह आसान लगता है क्योंकि वे अपने सपने के प्रति बहुत committed होते हैं। वे अपने सपने से इतना प्यार करते हैं कि वे इसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।
भले ही उन्हें व्यवसाय शुरू करने या नया करियर बनाने के लिए डिग्री हासिल करने के लिए या आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए दो साल की बचत करनी पड़े। हम अपने सपने के प्रति जितना अधिक committed होंगे, उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना उतना ही आसान होगा।
सपने देखने वालों के लिए बचत करना भी मुश्किल हो सकता है क्योंकि उनके पास हर दिन नए विचार आते हैं - और उन सभी के लिए बचत करने की ज़रूरत होती है। लेकिन सपने देखने वालों को यह ध्यान रखना होगा कि वे केवल सही विचारों का ही पीछा करें।
पैसे दान करने के पीछे की मानसिकता
कल्पना कीजिए कि हम सौ डॉलर के नोट को अपनी मुट्ठी में इतनी मजबूती से पकड़े हुए हैं कि कोई भी उसे हमारी मुट्ठी से छुड़ा नहीं सकता, इसे मुट्ठी बंद करना कहते हैं, और दुनिया के ज़्यादातर लोग इसी तरह से अपना पैसा पकड़ते हैं। बहुत से लोग सिर्फ़ अपने बारे में सोचते हुए ज़िंदगी जीते हैं।
पैसे के बारे में हम दो तरह से सोच सकते हैं - और दोनों ही हमारे दिल की स्थिति को प्रभावित करते हैं। या तो हम खुले हाथों से जी सकते हैं जैसे कि हम अपने पैसे के मैनेजर हैं और इसे अच्छी तरह से मैनेज करना जानते हैं, या हम कंजूस होकर जी सकते हैं जैसे कि यह सब हमारा है और इसे अपने पास ही रखना है।
खुले हाथों से जीने का मतलब है कि हम समझते हैं कि हमारा यहाँ कुछ भी नहीं है। सच्ची वित्तीय शांति तब मिलती है जब पैसा हमारा मालिक नहीं बल्कि हमारा साधन होता है। और ऐसा तब नहीं हो सकता जब हमारी आत्मा की ख़ुशी पैसे पर निर्भर हो।
देना ही वह तरीका है जो हमें यह जानने में मदद करता है कि सच्ची सुरक्षा कहाँ से आती है। देने से हमारे हाथ फिर से खुल जाते हैं, और हमें भरोसा होता है कि अगर हम बाँटेंगे तो हमारी भी ज़रूरतें पूरी होंगी। लेखक उदारता के तीन फायदे बताते है जो इस प्रकार है;
- यह हमें बेहतर इंसान बनाता है।
- यह हमें सच्ची खुशी देता है।
- यह हमारा विश्वास बढ़ाता है।
निष्कर्ष
Know Yourself, Know Your Money बुक समरी में हमने छः महत्वपूर्ण बातों के बारे में जाना, जो इस प्रकार थी;
- चार मनी क्लासरूम हमें अपनी पैसे की मानसिकता को समझने में मदद करते है।
- धन संबंधी सात ट्रेंड्स, हमारी मानसिकता का status बताते है।
- पैसे आने के साथ पैसे का डर भी आता है।
- हम कोई चीज क्यों खरीदते है यह हमें पता होना चाहिए।
- बचत हमारे सपनों से गहराई से जुड़ी होती है।
- दान, और अधिक पाने का एक तरीका है।