The Art Of Laziness बुक समरी में हम आलस्य की मानसिकता को समझने और आलस्य की मानसिकता को बेहतर करने के लिए टिप और टेक्निक्स के बारे में जानेंगे।
लेखक Library Mindset द्वारा लिखित The Art of Laziness बुक हमें आलस्य से निकलने और अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर जोर देती है। यह किताब ऐसे कई रहस्यों को उजागर करती है जो हमारे कार्य सफलता के लिए जरूरी है। जैसे अपने कार्य की जिम्मेदारी लेना, मल्टी टास्किंग ना करना जैसी बहुत सी बातों को साधारण तरीके से हमारे सामने पेश करती है ताकि हम उन्हें फॉलो कर सकें।
कोई भी आदत अचानक से छोड़ी और अपनाई नहीं जा सकती है। क्योंकि हर आदत हमारे मस्तिष्क में पैटर्न बनाती हैं और जब तक यह पैटर्न पूरी तरह धुंधले या नए नहीं बनते, तब तक हम कोई भी आदत छोड़ या बना नहीं सकते।
आलस्य की मानसिकता समझना
1. अपने कार्य की 100% जिम्मेदारी लेना।
दूसरों को दोष देने से हमारी समस्या हल नहीं होती है। हम चाहे जितना भी दूसरों को दोष देते रहे, इससे समस्या हल होने की जगह हमारे रिश्ते बिगड़ जाते हैं।
इसलिए लेखक अपने कार्य की जिम्मेदारी स्वयं लेने पर जोर देते हैं। ताकि उससे होने वाली गलतियों से हम सीख सके और आगे बढ़ सकें।
2. अपने comfort zone को छोड़ना।
हमारे आलसीपन का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि हम हर कार्य कल पर छोड़ना चाहते है, और आज अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहते है।
इससे बचने के लिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना, अपने लिए नए सपने देखना और नई समस्याओं को हल करना शुरू कीजिए।
3. आत्म अनुशासित रहना।
आत्म अनुशासन का मतलब होता है कि उन चीजों और कार्यों को करना जो भविष्य के लिए जरूरी है लेकिन वर्तमान में उन्हें करना कठिन लगता है। उन चीजों को लगातार करते रहना हमें आत्म अनुशासन की भावना और अपने भविष्य को बेहतर करने की उम्मीद देता है।
4. सही चीजों पर काम करना।
उन कामों को करने का कोई मतलब नहीं है जो बिल्कुल नहीं करने चाहिए। अगर हम जो करते हैं उससे प्यार नहीं करते है, तो हम हमेशा आलसी ही रहेंगे। ये हमारे शरीर के संकेत हैं कि हमें अपना काम बदल लेना चाहिए।
5. पूर्णतावाद की भावना से दूर रहे।
हमें perfectionism के स्विच को चालू और बंद करने में सक्षम होना चाहिए। क्योंकि कभी-कभी इसकी ज़रूरत होती है, और कभी-कभी नहीं।
हमेशा पूर्णतावादी न बने, परिस्थितियों के अनुसार इसे बदलते रहे। ताकि हम पूर्णता के पीछे अपने आलस्य को न छुपा सकें।
6. औसत दर्जे का मत बनो।
हमारे पास हमेशा महान बनने या औसत दर्जे का बनने का विकल्प होता है। महान बनना कोई आसान काम नहीं है। हमें हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देना, असफलता मिलने पर सीखना और बहुत संघर्ष की आवश्यकता होती हैं।
औसत दर्जे के लोग कभी भी अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं देते हैं, वे एक बार चीजें ठीक हो जाने पर शांत हो जाते हैं, या उन्हें पता होता है कि अगर वे आगे बढ़ते रहे तो चीजें मुश्किल हो जाएँगी।
7. मल्टीटास्किंग एक झूठ।
मल्टीटास्किंग का मतलब है; एक समय में एक से ज़्यादा कार्य करना। यह सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन यह कारगर नहीं है। हम एक ही समय में कई महत्वपूर्ण कामों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते।
अगर हमारे पास दो महत्वपूर्ण काम हैं, तो मल्टीटास्किंग हमारी कार्यक्षमता को कम कर देगी। साथ ही, हम लगातार काम बदलते रहते है, तो हमारी थकने की संभावना भी ज़्यादा होगी।
8. 3 टिप्स जो हमें अधिक उत्पादक बना देंगी।
- कार्य बदलने से बचना।
- हम जो कार्य कर रहे हैं, उसमें से सभी distractions को हटाना।
- अपने फोन पर सभी अनुपयोगी सूचनाओं को बंद करना।
9. दैनिक दिनचर्या विकसित करना।
एक दैनिक दिनचर्या विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि दैनिक दिनचर्या के बिना, हम अपने काम में निरंतरता नहीं रख सकते।
इसके बिना हम कुछ दिन, अच्छे कार्यों के लिए मोटीवेट होंगे, और बाकी दिन, हममें मोटिवेशन की कमी होगी, और हम टालमटोल करेंगे। इसलिए हमें अपने दिन को प्लान करना होगा।
10. ना कहना सीखना होगा।
अगर हम अपने जीवन और समय पर बेहतर नियंत्रण रखना चाहते हैं, तो हमें ना कहना सीखना होगा।
हम अक्सर हाँ कह देते हैं, भले ही हम न चाहते हों, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि हम दूसरे व्यक्ति को दुखी नहीं करना चाहते। लेकिन यह याद रखे कि दूसरों को खुश करने के चक्कर में हम खुद को खो देंगे।
11. 24/7 काम नहीं करना।
अधिक उत्पादक बनने का लक्ष्य अधिक काम करना नहीं है, बल्कि इसका उल्टा है। हमारा लक्ष्य, कम समय में अपना काम पूरा करना है ताकि हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता सकें।
अगर हम बहुत अधिक समय तक काम करते हैं, तो हमारी रचनात्मकता और उत्पादकता दोनों प्रभावित होती है।
12. एक्शन के लिए इंतज़ार न करना।
बहुत से लोगों के आलसी होने का एक मुख्य कारण यह है कि वे हमेशा सही समय का इंतज़ार करते रहते हैं ताकि वे कुछ कर सकें, लेकिन सही समय कभी नहीं आता।
कोई भी समय अच्छा या बुरा नहीं होता। हम आज ही शुरुआत कर सकते हैं और कुछ प्रगति कर सकते हैं, या हम इंतज़ार करके खुद को यह दिलासा दे सकते हैं कि हमारा समय आएगा।
13. खुद को सही लोगों के साथ घेरें।
हम अपने विचारों को बदलना चाहते हैं, तो हमें अपने कार्य और वातावरण को बदलना होगा।
अगर हम जिन लोगों के साथ सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं वे आलसी, नकारात्मक हैं और किसी भी तरह से हमारे जीवन को बेहतर नहीं बनाते हैं, तो अपने circle को बदलना या उनकी सलाह न मानना उचित है।
14. चिंता करने से कुछ नहीं मिलता।
आलसी व्यक्ति को चिंता करना बहुत पसंद होता है क्योंकि आलसी व्यक्ति के पास चिंता करने के अलावा और कुछ नहीं होता।
क्योंकि वे कोई काम नहीं कर रहे होते हैं, इसलिए वे भविष्य के बारे में चिंता ही करते रहते हैं। अगर हमें खुद पर भरोसा है, तो चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
15. पहले कठिन काम करो।
यहाँ अधिक उत्पादक बनने और बेहतर महसूस करने के लिए एक सरल टिप दी गई है जो यह है कि पूरे दिन में हमारे पास जो सबसे कठिन काम है, उसे पहले पूरा किया जाना चाहिए, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो, ताकि हम कुछ नया कर सकें।
आसान विकल्प = कठिन जीवन, कठिन विकल्प = आसान जीवन
16. टीम को मैनेज करना।
हर काम खुद से करना संभव नहीं है। चाहे हम कोई भी तकनीक, हैक या टिप्स आजमा लें, हमारे पास खुद से सब कुछ करने के लिए पर्याप्त समय कभी नहीं होगा।
कई चीजें हमारा बहुत समय ले लेती हैं जो उतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीं, उन्हें हम दूसरों को सौंप सकते हैं ताकि हम उस समय का उपयोग उन चीजों को करने में कर सकें जो हमें करनी चाहिए।
17. किसी भी चीज़ को तेजी से सीखना।
सिर्फ़ सीखने के लिए कुछ भी मत सीखो। ऐसी चीज़ें सीखो जो हमारी ज़िंदगी को बेहतर बना सकती हैं। इस बारे में सोचो कि हम क्या सीख रहे है, क्या वह उपयोगी है या नहीं।
अगर नहीं, तो उसे सीखने में समय बर्बाद न करो तो बेहतर है। ऐसी हज़ारों चीज़ें हैं जो हम आज सीख सकते है, जो मददगार हैं और हमारी ज़िंदगी को बेहतर बनाएँगी।
आलस्य से निपटने की टिप्स और तकनीकें
1. 80/20 नियम का उपयोग।
इसे पेरेटो सिद्धांत भी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हमारे 20% कार्य से हमारे 80% परिणाम मिलते है। ऐसी कई चीजें हैं जो हम हर दिन कर सकते हैं, लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जो महत्वपूर्ण हैं और सबसे अधिक परिणाम लाती है और कुछ अन्य चीजें हैं जो कम महत्वपूर्ण हैं जिन्हें करना और न करना बराबर होता है। इसलिए परिणाम के अनुसार काम का चयन करना भी जरुरी है।
2. पार्किंसन का नियम।
नियम का मतलब है कि काम पूरा करने के लिए, समय के अनुसार तरीके ढूढ़ने के लिए तैयार रहना। यदि हम किसी कार्य को पूरा करने के लिए खुद को 2 घंटे देते हैं, तो इसमें 2 घंटे लगेंगे। लेकिन यदि हमारे पास केवल 1 घंटा है, तो हमें एक घंटे में कार्य पूरा करने का तरीका खोजना भी आना चाहिए।
3. आलस्य पर काबू पाने की 8 जापानी तकनीकें।
- Ikigal; इसका मतलब है जीवन में एक उद्देश्य होना। वह कारण जिसके लिए हम हर सुबह कुछ करने के लिए उत्साहित होकर उठते हैं।
- Kaizen; इसका अर्थ है हर दिन छोटे-छोटे सुधारों पर ध्यान केन्द्रित करना और बड़े सुधारों की प्रतीक्षा न करना, बल्कि हर दिन 1% बेहतर बनने का प्रयास करना।
- Shoshin; इसका मतलब है कि चीजों को एक शुरुआती मानसिकता के साथ देखना।
- Hara Hachi Bu; इसका मतलब है कि जब हमारा पेट 80% भर जाए, तो खाना बंद कर दें। अगर हम बहुत ज़्यादा खा लेंगे, तो हमें आलस्य महसूस होने की संभावना ज़्यादा होगी।
- Shinrin-yoku; इसका मतलब है कि हमें प्रकृति के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना चाहिए। प्रकृति के साथ समय बिताना तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है।
- Wabi-sabi; इसका मतलब है कि पूर्णता के बजाय, अपूर्णता में सुंदरता ढूंढनी चाहिए। हर समय चीजें परिपूर्ण नहीं हो सकतीं।
- Ganbaru; कोई भी काम करने में ज्यादा समय नहीं लगता, चाहे कोई कितनी भी कोशिश कर ले।
- Gaman; इसका अर्थ है जब हालात कठिन हो जाएं तो धैर्य और दृढ़ता दिखाना।
4. सोने से पहले 10 मिनट तक ये काम करें।
हर दिन महत्वपूर्ण है। हमारे लिए आगे बढ़ना और पीछे देखना दोनों जरुरी है। हमें अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए ताकि हम जाँच कर सकें कि हम सही काम कर रहे हैं या नहीं। और अगर हम सही काम कर रहे हैं, तो उन्हें कैसे और अधिक बेहतर किया जा सकता है?
5. 10 छोटी आदतें जो हमारी जिंदगी बदल देंगी।
- अपने शरीर को हिलाएँ; हमारा शरीर पूरे दिन बैठने के लिए नहीं बना है। अगर हम कोई शारीरिक काम नहीं करेंगे, तो हमें हर समय थकान महसूस होगी।
- हम क्या खा रहे हैं; हम जो खाते हैं उसका प्रभाव दिन भर हमारी भावनाओं पर पड़ता है।
- एक उद्देश्य रखें; यदि हमारे पास कोई उद्देश्य नहीं है, तो हमारे पास कुछ भी करने की ऊर्जा नहीं होगी।
- अधिक पानी पीना; यह ध्यान रखें कि हम दिन भर भरपूर पानी पी रहे हैं।
- अपने आस-पास ऐसे लोगों को रखें जिन्हें हम प्यार करते हैं; नकारात्मक लोगों के साथ रहना बंद करें। अपने जीवन में मौजूद सभी विषैले लोगों से दूर हो जाएँ।
- जोखिम लें; अगर हम जोखिम नहीं उठा रहे हैं, तो हमारे पास काम करने की प्रेरणा नहीं होगी।
- अपने आप पर अधिक बोझ न डालें; खुद से अवास्तविक उम्मीदें रखना बंद करें।
- मल्टीटास्किंग न करें; मल्टीटास्किंग एक झूठ है। यह हमें जल्दी थका देता है।
- सभी distractions को दूर करना; सबसे अच्छी बात जो हम कर सकते हैं वह है अपने आस-पास के सभी distractions को कम करना।
- Urgency की भावना रखना; अगर हममें urgency की भावना नहीं है तो हम अपने जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। हमें परिणामों के प्रति धैर्यवान और कार्य के प्रति actionable होना चाहिए।
6. पोमोडोरो तकनीक का उपयोग
यह तकनीक बहुत सरल है, हमें बस इतना करना है: 25 मिनट तक बिना रुके काम करना, फिर 5 मिनट का ब्रेक लेना और इसे दोहराना।
7. 5 मिनट का नियम
एक नया नियम जो हमें हमेशा अपनाना चाहिए वह यह है कि जो भी काम 5 मिनट के अंदर किया जा सकता है उसे अभी कर लेना चाहिए। ऐसे कामों को कल पर नहीं टालना चाहिए।
8. दो दिवसीय नियम
दो दिन का नियम सरल है: हमें किसी भी कार्य को करते समय उसमें दो दिन का ब्रेक नहीं लेना है। अगर हमें ज़रूरत हो तो हम एक दिन के लिए छोड़ सकते हैं, लेकिन दो दिन के लिए कभी नहीं।
निष्कर्ष
The Art Of Laziness बुक समरी में हमने दो महत्वपूर्ण बातें सीखी है जो इस प्रकार है;
- आलस्य की मानसिकता को समझना; जिसमें हमने 100% जिम्मेदारी लेना, अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना, अनुशासित रहना, सही चीजों पर काम करना, पूर्णतावाद की भावना से दूर रहना, मल्टीटास्किंग से बचना, दैनिक दिनचर्या बनाना, ना कहना सीखना आदि के बारे में जाना।
- आलस्य को छोड़ने और उत्पादकता बढ़ाने की कुछ टिप्स और तकनीक के बारे में जाना; जिसमें 80/20 का नियम, पार्किंसन का नियम, आलस्य को काबू करने की 8 जापानी तकनीकें, आदि शामिल है।