The Alchemy of Finance बुक समरी में हम Reflexivity का सिद्धांत, क्रेडिट चक्र का खेल, सामूहिक ऋण प्रणाली, बैंकिंग प्रणाली का विकास, और फ्री मार्केट VS रेगुलेटरी मार्केट को जानेंगे।
लेखक George Soros द्वारा लिखित The Alchemy of Finance बुक हमें वित्तीय मार्केट के उन महत्वपूर्ण कारकों से अवगत कराती है, जो मार्केट में तेजी और मंदी का कारण बनते हैं। यह बुक एक ऐसा सिद्धांत देती है जो हमें मार्केट को समझने और उसके साथ बने रहने में मदद करते है। साथ ही यह किताब स्टॉक मार्किट, करेंसी मार्किट, क्रेडिट चक्र, इंटरनेशनल लोन, और बैंकिंग सिस्टम जैसे अनेक पहलुओं पर भी जोर देती हैं।
इस बुक में, हम फाइनेंशियल ज्ञान के कुछ रहस्य जानने का प्रयास करेंगे, जो जाने-अनजाने में सभी प्रकार के मार्केट पर प्रभाव डालते है। ये सूक्ष्म बातें हमारी फाइनेंशियल एनालिसिस को बेहतर बनाने में मदद करती है।
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The Alchemy of Finance Book Summary Hindi |
Reflexivity का सिद्धांत
हम सभी अधिकतर बातें फैक्ट के अनुसार करते हैं लेकिन जब उन्हें फॉलो करने की बारी आती है, तब फैक्ट से अधिक हम अपने भावनाओं, धारणाओं और विश्वासों को अपनी बातों और विचारों में शामिल कर लेते हैं।
इसी प्रकार reflexivity का सिद्धांत हमें बताता है कि मार्केट में पार्टिसिपेट करने वाले लोगों की धारणाएं और कार्य, फैक्ट के अनुसार न होने के कारण, ये मार्केट के बुनियादी सिद्धांतों को भी सक्रिय रूप से प्रभावित करते हैं।
मार्किट क्रैश से पहले, मार्केट एक सकारात्मक फीडबैक लूप के ट्रेंड के साथ बढ़ता नजर आता हैं। क्योंकि बढ़ती कीमतें, निवेशकों को आशावादी बनाती हैं और कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी होती है।
इसके विपरीत, किसी दुर्घटना के दौरान, नकारात्मक फीडबैक लूप बाजार के निराशावाद को बढ़ा देता है, जिससे घबराहट में सेल्लिंग होती है और कीमतों में और अधिक गिरावट आती है।
फाइनेंसियल मार्केट में, सफलता पूर्वक लंबे समय तक टिके रहने के लिए हमें Reflexivity को समझना आवश्यक है। हम मार्केट पैटर्न और डाटा की मदद से चल रही गलतियों को समझ सकते हैं। जिससे एक अनुमान लगाया जा सकता कि मार्केट ट्रेंड किस ओर जा सकता है?
क्रेडिट चक्र का खेल
क्रेडिट चक्र का खेल कई चरणों में चलता है, जिसकी शुरुआत ऋण के विस्तार से होती है क्योंकि ऋणदाता उधारकर्ताओं को ऋण देते हैं। जैसे-जैसे ऋण का विस्तार होता है, परिसंपत्ति की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे बाजार सहभागियों के बीच आशावाद और सट्टेबाजी का उत्साह बढ़ता हैं।
क्रेडिट एक विशेष प्रकार की रिफ्लेक्सीव पैटर्न से जुड़ा हुआ है जिसे तेजी और मंदी के रूप में जाना जाता है। क्रेडिट हमें खरीदने की क्षमता देता है, जिसके कारण मार्किट पैटर्न बदलते रहते है, और धीरे-धीरे यह बदलाव तेज हो जाता है,उसके बाद विस्फोट अचानक और अक्सर विनाशकारी होता है।
इसके विपरीत जब रिफ्लेक्सीव प्रक्रिया में क्रेडिट एक आवश्यक घटक नहीं होता है तो पैटर्न अधिक समान या कम बदलते हैं। उदाहरण के लिए करेंसी मार्केट में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि डॉलर बढ़ रहा है या गिर रहा है, एक्सचेंज रेट एक लहर जैसे पैटर्न का पालन करता हैं।
जैसे-जैसे ऋण चक्र परिपक्व होता है, कमजोरियाँ उभरती हैं, जिससे कर्ज देने में कमी होने लगती है और परिसंपत्ति की कीमतों में गिरावट आती है। क्रेडिट चक्र के उलटने से परिसंपत्तियों की बिक्री का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिससे बाजार में संकट और आर्थिक मंदी आती है।
सामूहिक ऋण प्रणाली
कर्ज देने का सामूहिक सिस्टम, आपातकाल से पैदा हुआ एक सिस्टम है।
सामूहिक ऋण प्रणाली में, ऋणदाता उधारकर्ताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने, उत्पादकता बढ़ाने और आर्थिक विकास लिए अपने संसाधनों को एकत्रित करने में मदद करती हैं। हालाँकि, सामूहिक ऋण प्रणाली संवेदनशील है, क्योंकि ऋणदाताओं की धारणाएँ और कार्य, कर्ज की उपलब्धता और बाज़ार की स्थितियों को प्रभावित कर सकती हैं।
पहले केंद्रीय बैंक, ब्याज दरों को नियंत्रित करके आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे, अब पैसे की मात्रा को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
किसी देश की उधार लेने की क्षमता को मापने के लिए ऋण अनुपात का उपयोग करते हैं। इस अनुपातों को आमतौर पर वस्तुपरक माप माना जाता है जबकि वास्तव में वह ट्रेंड है। इसके अलावा ऋण अनुपात केवल किसी देश की भुगतान करने की क्षमता को मापता है उसकी इच्छा को नहीं।
कर्ज देने का सामूहिक सिस्टम, आपातकाल से पैदा हुआ एक सिस्टम है। इसे जीवित रहने के लिए आपातकालीन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, और इसे इस तरह बनाया गया है कि आपातकालीन परिस्थितिया उत्पन्न की जा सके, जो इसे अस्तित्व में रखने के लिए आवश्यक है।
बैंकिंग प्रणाली का विकास
जो बैंकिंग सिस्टम को जानता है उसे सिस्टम अमीर बना देता है और जो नहीं जानता उससे सब छीन लेता है।
ऐतिहासिक रूप से, बैंकों ने बचतकर्ताओं और उधारकर्ताओं को जोड़ने का काम किया है, साथ ही संपन्न क्षेत्रों से घाटे वाले क्षेत्रों तक धन पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालाँकि, बैंकिंग प्रणाली संवेदनशीलता से अछूती नहीं है, क्योंकि बैंकों की धारणाएँ और कार्य क्रेडिट स्थितियों और मार्केट की गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
समय के साथ बैंकिंग नियमों और तकनीकों ने मार्केट को एक नया आकार दिया है। डेरिवेटिव्स और सिक्योरिटीज जैसे जटिल फाइनेंसियल प्रोडक्ट्स के विकास ने, बैंकिंग गतिविधियों की प्रकृति को ही बदल दिया है और फाइनेंसियल मार्केट में नए जोखिम पेश किए हैं।
बैंकिंग सिस्टम के विकास के साथ ऋण लेना और पैसे का उपयोग भी बढ़ा है, जिसके चलते हमारे पास बेहतर अवसर है पैसे बनाने और खोने के। क्योंकि बैंकों को विकास करने के लिए पैसे चाहिए और उन्हें पैसा कर्ज और निवेश से ही मिलता है।
फ्री मार्केट और रेगुलेटरी मार्केट
फ्री मार्केट, दक्षता प्राप्त करने और धन बनाने के अवसर प्रदान करता हैं। इस प्रकार का मार्केट सट्टेबाजी और बाज़ार विफलताओं के प्रति भी संवेदनशील होता हैं। नियमों पर चलने वाला मार्केट इन जोखिमों को कम करना और निरीक्षण के माध्यम से बाजार स्थिरता को बढ़ावा देता है।
नियम मार्केट की चुनौतियों को समाप्त नहीं करते और ना ही करना चाहिए। क्योंकि नियम जाने-अनजाने में बाजार प्रोत्साहन को ख़त्म कर सकते हैं, या नई विचार धारा को बाधित कर सकते हैं, या अनपेक्षित परिणाम पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा, नियम के ढाँचे मार्केट के विकास में पिछड़ सकते हैं, जिससे निगरानी और बदलाव में कमी रह सकती है। इसलिए फ्री मार्केट और रेगुलेटरी मार्केट दोनों ही जरुरी है और हमें दोनों को समझना होगा।
निष्कर्ष
The Alchemy of Finance बुक समरी में हमने पांच महत्पूर्ण बातें सीखी जो इस प्रकार है;
- Reflexivity का सिद्धांत हमें फैक्ट और मानव धारणाओं के बारे में बताता हैं।
- अपने पैसे के डर और भावनाओं को हम क्रेडिट चक्र की मदद से समझ सकते है।
- सामूहिक ऋण प्रणाली हमें अपने व्यवसाय और निवेश को बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद करती है।
- समय के साथ बैंकिंग सिस्टम ने बचतकर्ता और उधारकर्ता को जोड़ने का काम किया है।
- निवेश में सफलता के लिए हमें फ्री मार्केट और रेगुलेटरी मार्केट दोनों की आवश्कता होती है।