Unknown Market Wizards Book Summary Hindi

Unknown Market Wizards बुक, ट्रेडिंग साइकोलॉजी, ट्रेडिंग सिस्टम, ट्रेडिंग जर्नल, रिस्क मैनेजमेंट, कार्य योजना बनाना, पोजीशन मैनेजमेंट जैसे कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर देती है।

लेखक Jack D. Schwager द्वारा लिखित Unknown Market Wizards बुक हमें उन सफल ट्रेडर्स के बारे में बताती है, जो लोगों की पहुंच और दिखावे से दूर रहते हैं, और इनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ट्रेडिंग सफलता के लिए हमें अधिकतर खुद पर काम करना होता है। इसलिए यह बुक सफल ट्रेडर्स के उन सफल रहस्यों को उजागर करती है जिससे हम ट्रेडिंग में अपनी मानसिकता और कार्य करने की क्षमता को बेहतर कर सकें।

इस बुक में हम सफल ट्रेडर्स के वे 46 नियमों के बारे में जानेंगे, जो हमें ट्रेडिंग में सफलता दिला सकते हैं। बस जरूरत है तो केवल अभ्यास के द्वारा उन्हें अपने ट्रेडिंग लाइफ में उपयोग करने की।

ट्रेडिंग साइकोलॉजी

1. ट्रेडिंग सफलता के अनेक रास्ते है, हमें अपना रास्ता खुद ढूंढना होगा।

ट्रेडिंग में सफलता का मतलब सही रास्ता ढूंढना नहीं है, बल्कि हमें अपनी मानसिकता के अनुसार ट्रेडिंग रास्ता चुनना होता है। और कोई दूसरा हमें यह नहीं बता सकता कि हमारी मानसिकता के अनुसार क्या सही है और क्या गलत? यह हमें खुद ही खोजना है, कि हमारे लिए क्या सही है?

2. हमें अपने खराब ट्रेड का वास्तविक नुकसान, रूल्स तोड़ने पर मिलता है।

हम अपने ट्रेडिंग रूल्स इसलिए बनाते है कि हम ट्रेडिंग से पैसा बना सकें। लेकिन हम अपने मन के एक अदृश्य सिस्टम के रूल्स को फॉलो करके ट्रेड लेते है, और ट्रेडिंग सिस्टम की तरह प्रॉफिट भी अदृश्य हो जाता है।

3. अपनी राय बदलने का लचीलापन एक गुण है, नाकि एक बुरी आदत।

ट्रेडिंग करते समय अगर हमें किसी ट्रेड के चलने की संभावना अधिक दिखाई देती है, और हम ट्रेड में एंट्री ले लेते है। उसके बाद, ट्रेड हमारी अपोजिट दिशा में जाता है तब हमें अपनी राय छोड़कर एग्जिट स्ट्रेटेजी पर ध्यान देना होगा।

4. छूटे हुए ट्रेड, लॉस की तुलना में अधिक दर्दनाक और अधिक महंगे हो सकते हैं।

जो ट्रेड छूट जाते है अगर उन ट्रेड को हम भूल नहीं सकते, तो हम आने वाले ट्रेड को बेहतर तरीके से मैनेज नहीं कर सकते है। क्योंकि हम फ्री समय यह सोचकर बिताएंगे कि हमारा कोई ट्रेड छूट न जाये, नाकि अपने ट्रेड को बेहतर बनाने के बारे में सोचते हुए।

5. जब हम मार्केट को नहीं समझ पाते हैं तब क्या करें?

जब हमारी ट्रेडिंग योजनाएं और सिस्टम काम नहीं करते और कुछ समय तक लगातार लॉस दे रहे है। तो हमें अपनी पोजीशन साइज कम करके इसका कारण ढूढ़ना होगा या ट्रेडिंग से एक ब्रेक भी ले सकते, ताकि हमारा माइंड फ्रेश हो सकें।

6. न्यूज़ के विपरीत मार्केट की प्रतिक्रिया हमें क्या बताती है।

किसी न्यूज़ पर मार्केट कैसी प्रतिक्रिया देगा यह कोई नहीं जानता, इसलिए न्यूज़ ट्रेड करते समय हमें मार्केट की प्रतिक्रिया का इंतजार करना होगा। जब मार्केट किसी न्यूज़ से अधिक प्रभावित होता है तब वह किसी भी टेक्निकल रूल को फॉलो नहीं करता है।

7. प्रॉफिटेबल होना और सही होने के बीच अंतर।

प्रॉफिट और लॉस हमें किसी ट्रेडिंग की परफॉर्मेंस के बारे में बताते है इसलिए हम कितने समय सही थे यह अधिक मायने नहीं रखता, बल्कि हम जितनी बार सही थे उससे हमने कितना प्रॉफिट बनाया यह मायने रखता है।

8. लगातार प्रॉफिट बनाने का लक्ष्य रखना, ट्रेडिंग में लॉस होने का कारण बन सकता है।

ट्रेडिंग लगातार सही होने या लगातार प्रॉफिट बनाने के बारे में नहीं है। यह सही होने पर अपने लॉस से अधिक प्रॉफिट बनाने के बारे में है। इसलिए अपने ट्रेडिंग सिस्टम की प्रॉफिटेबिलिटी पता होना जरुरी है।

9. न्यू व्यावहारिक ट्रेंड के प्रति जागरूक और अपनी रिसर्च जारी रखें।

ट्रेडिंग में प्रतिदिन न्यू ट्रेंड चलते रहते है बस हमें उन्हें पहचानना और ट्रेड करना आना चाहिए। हम जितनी जल्दी किसी अवसर को पहचानते है, हम उतना ही अधिक दूसरों के मुकाबले पैसा बनाते है।

इसलिए अपने लिए हमेशा बेहतर अवसर खोजने का प्रयास करें, लगातार मार्केट में बने रहने और नई चीजों को खोजते रहने से इस प्रकार के अवसर को देखना सीख सकते हैं।

10. जीवन चलाने के लिए ट्रेडिंग पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए।

एक बिगिनर ट्रेडर को अपने ट्रेडिंग को आजीविका का साधन इसलिए नहीं मानना चाहिए क्योंकि ट्रेडिंग कोई मंथली सैलरी देने का वादा नहीं करती है, और हमारे खर्चे हर महीने होते है।

इसके लिए हमें ट्रेडिंग के साथ और भी इनकम के सोर्स बनाने होंगे, जब तक कि हम ट्रेडिंग में बेहतर न करने लगे या अच्छा पैसा न बनाने लगें।

11. अपने कार्य के प्रति कमिटेड रहना।

ट्रेडिंग में कमिटमेंट की आवश्यकता होती है। जो लोग सोचते है कि ट्रेडिंग बहुत ही आसान बिज़नेस है और वे इससे बहुत अधिक पैसा बना सकते है। वे लोग ट्रेडिंग में बहुत ही कम समय के मेहमान होते है।

12. अपने परिणामों की जिम्मेदारी स्वयं लें।

सफल ट्रेडर अपने हर रिजल्ट की जिम्मेदारी स्वयं लेते है, चाहे प्रॉफिट हो या लॉस। और एक losing ट्रेडर अपने हर रिजल्ट के लिए दूसरों को दोष देता हैं।

13. ट्रेडिंग में धैर्य की आवश्यकता।

ट्रेडिंग में हमें दो प्रकार से धैर्य की आवश्यकता होती है। एक, अच्छे ट्रेड सेटअप का इंतजार करने के लिए और दूसरी, अच्छे ट्रेड में बने रहने के लिए।

14. ट्रेडिंग का आंतरिक खेल महत्वपूर्ण है।

ट्रेडिंग एक आंतरिक खेल है जो हमारी भावनाओं और साइकोलॉजी पर चलता है। अपने प्रत्येक ट्रेड में, चाहे प्रॉफिट हो या लॉस, अगर हम ख़राब प्रतिक्रिया देते है तो हम और अधिक गलतियां करेंगे।

ट्रेडिंग सिस्टम

15. एक ऐसा ट्रेडिंग सिस्टम खोजे जो अपनी मानसिकता के अनुसार हो।

हर सिस्टम से पैसा बनता है लेकिन हर ट्रेडर उस सिस्टम से पैसे बना सकता है या नहीं। इसका कोई जवाब नहीं है। इसलिए बेहतर सिस्टम भी बदतर परफॉर्म कर सकता है अगर हमारी मानिसकता उस सिस्टम के अनुसार न हो तो।

इसलिए सफल ट्रेडर अपनी मानसिकता के अनुसार सिस्टम ढूंढने पर जोर देते हैं।

16. सही तरीका ढूंढने से पहले हमें अपना तरीका बदलना पड़ सकता है।

ट्रेडिंग में लर्निंग पीरियड के समय हमें अपने सिस्टम में अलग-अलग चीजें लागू करके देखना होता है कि हमारी मानसिकता के अनुसार क्या काम करता है और क्या नहीं?

इसलिए ट्रेडिंग को शुरू करते समय हमें टेक्निकल, फंडामेंटल और साइकोलॉजिकल चीजों का ज्ञान और उपयोग करने के तरीके सीखने होते है।

17. सही ट्रेडिंग स्टॉप-लॉस लेवल का उपयोग करना।

ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस लेवल का मतलब, उस लेवल से है जहां हमारी सोच गलत सिद्ध होती है, नाकि हम इतना लॉस करना चाहते है। अगर स्टॉप-लॉस सही जगह लगाने से हमें अधिक लॉस होता है तो हमें अपनी पोजीशन साइज को कम करना होगा।

18. हमेशा स्टॉप लेवल हिट होने का इंतजार न करें।

एक बिगिनर ट्रेडर को यह एडवाइस दी जाती है कि उसे या तो स्टॉप-लॉस या टारगेट हिट होने के बाद ही अपनी पोजीशन को छोड़ना है। लेकिन अनुभवी ट्रेडर के लिए यह सही नहीं है।

एक अनुभवी ट्रेडर अपनी योजना के अनुसार काम करता है। इसलिए योजना के अनुसार मार्केट काम नहीं करता है तो वे अपनी पोजीशन को छोड़ सकते है।

ट्रेडिंग जर्नल बनाना

19. अपने पास एक ट्रेडिंग जर्नल अवश्य रखें।

ट्रेडिंग जर्नल बनाना, प्रभावशाली उपकरणों में से एक है, जो हमारी ट्रेडिंग को बेहतर बनाने में मदद करती है। ट्रेडिंग जर्नल हमें दो महत्पूर्ण बातें बताती है; पहली हम क्या सही कर रहे है? और दूसरी हम क्या गलत कर रहे है?

20. अपने ट्रेडों को बांटना।

ट्रेडों को बांटना एक उपयोगी रणनीति है जो हमारे ट्रेडों को काम करते और नहीं करते से अलग करती है। यह रणनीति हमें अपने बेस्ट और नॉर्मल ट्रेड के बिच अपने रिस्क को मैनेज करना और मानसिक रूप से अपनी ट्रेडिंग को मैनेज करने पर जोर देती है।

21. अपनी ट्रेडिंग बढ़त को जानना।

हमें किस ट्रेड पर ध्यान केंद्रित करना है और किस पर नहीं, इसकी पहचान करने के लिए अपनी बढ़त को जानना जरुरी है। ट्रेडिंग बढ़त ही हमें बाकि ट्रेडर्स से अलग और बड़ा प्रॉफिट बनाने में मदद करती है।

22. अपनी ट्रेडिंग गलतियों से सीखना।

एक ट्रेडर कभी-भी अपनी गलतियों से सीखे बिना ट्रेडिंग में सफलता हासिल नहीं कर सकता है। इसलिए ट्रेडिंग जर्नल रखने पर जोर दिया जाता है ताकि हम अपनी गलतियों को पहचान सके और उन पर काम कर सकें।

23. अपनी ट्रेडिंग में asymmetric strategies का उपयोग करना।

असिमेट्रिक ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी का मतलब है एक कम और दूसरा अधिक। जैसे अगर हमें मार्केट से पैसा बनाना है तो हमें अपने लॉस से दोगुना पैसा बनाना होगा, या फिर सिस्टम की profitability बढ़ानी होगी। ताकि हम अपने लॉस से अधिक पैसा बना सकें।

24. ट्रेडिंग सिस्टम कभी-कभी काम करना बंद कर देते हैं।

हमारा ट्रेडिंग सिस्टम हर मार्केट परिस्थितियों में काम करे, यह जरुरी तो नहीं है। इसलिए हमें अपने सिस्टम का वह पहलू भी पता होना चाहिए जब हमारा सिस्टम या योजनाए काम नहीं करती है।

रिस्क को मैनेज करना

25. अपने ट्रेडिंग रिस्क को मैनेज करना।

ट्रेडिंग में सफलता के रहस्यों में से एक रिस्क को मैनेज करना भी है। क्योंकि अगर हम अपने रिस्क को मैनेज नहीं करते है तो ट्रेडिंग करने के लिए हमारे पास कैपिटल ही नहीं होगी।

26. रिस्क के बारे में अनुमान लगाने की कोशिश न करें।

एक बिगिनर ट्रेडर रिस्क का अनुमान लगाकर ट्रेड लेता है जैसे 'यहां पर ट्रेड लेने से मुझे रिस्क कम होगा और प्रॉफिट अधिक'।

इस प्रकार की मानसिकता के कारण एक ट्रेडर अपने सेटअप के बनने से पहले ही ट्रेडिंग में घुस जाता है। और ट्रेड समाप्त होने पर अधिक लॉस के साथ ट्रेड को छोड़ता है।

कार्य योजना बनाना

27. जीतने वाले ट्रेडर्स के पास एक कार्य योजना होती है।

हर ट्रेडर की अपनी कार्य योजना होती है जिसके अनुसार ट्रेडर अपने ट्रेड और सिस्टम को मैनेज करता है जिसमें रिस्क मैनेजमेंट, मनी मैनेजमेंट और साइकोलॉजी शामिल है।

28. अपनी योजना द्वारा बनाये गये ट्रेडों पर टिके रहें।

अपने योजनाओं पर टिके रहना ट्रेडिंग सफलता का एक रहस्य है। क्योंकि मार्केट में हर पल नया देखकर कुछ करने की इच्छा होना, या अधिक पैसे बनाने के लिए अपने प्रॉफिटेबल सेटअप में भी हेर-फेर करना आम बात है। जो हमें सफलता से दूर ले जाती है।

29. अपनी ट्रेडिंग योजनाओं को मार्केट के अनुसार अपडेट करना।

मार्किट हमेशा बदलता रहता है। ऐसी परिस्थितियों में हमें अपने सिस्टम और ट्रेडिंग योजनाओं को भी अपडेट करना जरुरी हो जाता है। हो सकता है कि जो योजना या सिस्टम बुलिश पक्ष में काम कर रहा था, वह बेयरिश पक्ष में उतनी अच्छी तरह काम न करें।

30. यदि हमें अपनी योजना का कोई पहलू समझ नहीं आता है तो उसे बदल देना चाहिए।

हमारा सिस्टम बहुत अच्छा हो सकता है लेकिन कभी-कभी उस सिस्टम के एक पहलु के कारण हमें अपने प्रॉफिट गवाना पड़ता है। वह कुछ भी हो सकता है जैसे प्रॉफिट लेने या स्टॉप लॉस लेने में परेशानी आदि।

इससे बचने के लिए यह देखे कि उस पहलू को किस प्रकार बेहतर किया जा सकता है? और इसका हमारे पुरे सिस्टम पर क्या प्रभाव होगा?

31. किसी ट्रेड आइडिया को कैसे लागू किया जाता है यह महत्वपूर्ण है।

मार्केट में हम हर दिन अपना ट्रेडिंग प्लान बनाते और उसे मार्केट खुलने पर execute करते है। इस प्लान या आईडिया को हम मार्केट में किस प्रकार execute करते है, यही हमें मार्केट से पैसा बनाकर देता है या हमारी साइकोलॉजिकल परेशानियों का कारण बनता है।

पोजीशन मैनेजमेंट

32. Brandt फ्राइडे closing नियम।

Brandt नियम के अनुसार हर शुक्रवार को हमें अपनी पोजीशन चेज करनी है, अगर पोजीशन लॉस दिखाती है तो हमें स्टॉप लॉस हिट होने से पहले ही अपनी पोजीशन छोड़ देनी चाहिए। ताकि हमारा वीकेंड लॉस को प्रॉफिट में लाने की संभावनाओं के बारे में सोचते हुए न बीते।

33. अपने बेहतर ट्रेड सेटअप पर बड़ी पोजीशन लें।

एक बिगनेर ट्रेडर को यह सलाह दी जाती है कि सभी ट्रेड में सामान पोजीशन साइज रखे ताकि उसे अधिक लॉस या प्रॉफिट न हो। केवल वह मार्केट को सीख सके और खुद को मानसिक रूप से ट्रेडिंग के लिए तैयार कर सकें।

बेहतर ट्रेडर को एक जैसी पोजीशन साइज के साथ ट्रेड करना उसे अधिक प्रॉफिटेबल नहीं बना सकता, इसलिए अपने बेहतर ट्रेडिंग सेटअप पर अपनी normal पोजीशन साइज से बढ़ाकर ट्रेड करे ताकि हम अपने लॉस को कवर करने के बाद भी अधिक पैसा बचा सकें।

34. इतनी बड़ी पोजीशन साइज के साथ ट्रेड न करें कि डर अपने ऊपर हावी हो जाये।

बेहतर ट्रेड सेटअप में बड़ी पोजीशन के साथ ट्रेड करते समय इस बात का ध्यान रखे, कि पोजीशन साइज इतनी न बढ़ा दे कि हम डर कर अपने ट्रेड सेटअप के बनने से पहले एंट्री करना या टारगेट हिट होने से पहले ही निकलने जैसी गलतियां करने लगें।

35. प्रॉफिट लेवल तक पहुंचने पर, अपनी पूरी पोजीशन न छोड़े।

अपने टारगेट लेवल पर पहुंचने पर हमें अपने ट्रेड की 75-80% ट्रेडिंग पोजीशन छोड़ देनी चाहिए, लेकिन बाकि बची हुए ट्रेडिंग पोजीशन को ट्रेलिंग स्टॉप लॉस के साथ चलने देना है। यह रणनीति हमें बड़ा प्रॉफिट बनाने में मदद करती है।

भावनात्मक मैनेजमेंट

36. यदि हम यह सोचने लगे कि यह ट्रेड चलेगा ही चलेगा तो हमें उस ट्रेड को छोड़ देना चाहिए।

जब फैक्ट को देखने के बजाये उम्मीद करने लगते है कि ट्रेड चलेगा ही चलेगा। तो इसका मतलब है अगर लॉस होता है तो हम मानसिक रूप से उसे झेलने के लिए तैयार नहीं है।

37. किसी दूसरे के बताने पर ट्रेड न लें।

बेहतर ट्रेडिंग करने के लिए, हमें अपने ट्रेडिंग सेटअप और प्लान की आवश्यकता होती है। क्योंकि जो व्यक्ति हमें ट्रेड suggest करता है, वह मानसिक रूप से हमारे ट्रेड के लिए जिम्मेदार नहीं होता है।

साथ ही हम प्रॉफिट होने पर खुद पर विश्वास नहीं कर पाते है और लॉस होने पर सीखने के बजाये हम दुसरो को दोष देते हैं।

38. ट्रेड रिजल्ट और ट्रेड निर्णयों के बीच अंतर स्पष्ट रखें।

ट्रेडिंग निर्णय और रिजल्ट को जोड़ देने पर, हम यह सोचने लगते है कि शायद हमारा ट्रेडिंग निर्णय गलत है या सिस्टम में कुछ गलतियां। जिसके कारण हम 100% सही निर्णय लेने पर जोर देने लगते है, और हम सभी जानते है कि मार्केट में यह संभव नहीं है।

39. किसी ट्रेड का रिस्क टू रिवॉर्ड रेश्यो बदलता रहता है।

ट्रेडिंग करते समय ध्यान रखें कि ट्रेड प्रॉफिट की दिशा में 50% मूव करने के बाद हमें अपने रिस्क को कम कर देना है। जिससे रिस्क लगभग न के बराबर होगा और प्रॉफिट की संभावना ज्यादा होगी।

40. इमोशंस, ट्रेडिंग बिजनेस के लिए हानिकारक है।

हमें यह समझना होगा कि हम ट्रेडिंग बिजनेस कर रहे है, और अपने बिज़नेस को लेकर कोई बिजनेसमैन इमोशनल नहीं होता। इस प्रकार हमें भी अपने बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए काम करना होगा नाकि परेशानियां आने पर छोड़कर भागना।

41. लगातार ट्रेडिंग निर्णय लेने से बचें।

लगातार या आवेगपूर्ण निर्णय हमें अपने सिस्टम को छोड़कर भावनाओं में बहकर ट्रेड करने के लिए ललचाते है। हम और अधिक पैसा बनाने की कोशिश में, ऐसा करते भी है। इससे बचने के लिए अपने सिस्टम और प्लान के अनुसार ट्रेड ले और अपनी भावनाओं में बहने से बचना होगा।

42. लालच से प्रेरित होकर ट्रेड करने से, उसका अंत आमतौर पर बुरा ही होता है।

लालच अच्छा भी है और बुरा भी। अगर हम पैसे कमाने के लिए अपने सिस्टम और प्लान के एंट्री देने से पहले या कही ओर एंट्री लेते है तब लालच गलत है।

वही अपना प्रॉफिट टारगेट हिट होने पर हम अपनी 75% ट्रेडिंग पोजीशन तुरंत एग्जिट कर देते है तो यह लालच ठीक है।

43. Revenge Trading से सावधान रहना।

प्रॉफिट और लॉस मार्केट के दो पहलू है, और मार्केट में बने रहने के लिए इन दोनो पहलुओं को स्वीकार करना होता है। खासकर बिगनर ट्रेडर मार्केट से लॉस करने पर, मार्केट से लड़ने लगता है। इससे बचने के लिए, हमें अपने ट्रेड के प्रति मानसिक लचीलापन रखना होगा।

44. अगर ट्रेडिंग करते समय उत्साह और घबराहट होती है तो खुद को शांत करने का प्रयास करें।

अच्छे ट्रेड में प्रॉफिट देखकर हममें उत्साह पैदा होता है, और प्रॉफिट चला न जाये ये सोचकर घबराहट भी होती है। इसलिए प्रॉफिटेबल ट्रेड को मैनेज करना जरुरी हो जाता है। इससे बचने के लिए ट्रेडिंग प्रक्रिया पर ध्यान दे और साथ ही ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करें।

45. बड़ा प्रॉफिट बनाने के बाद लापरवाह ट्रेड करने से सावधान रहें।

मार्केट में हम लगातार सही होने लगते है तो हमें लगने लगता है कि हमने सब कुछ जान लिया। इस सोच के कारण, ट्रेडर अपनी योजनाओं और सिस्टम को छोड़कर कही पर भी ट्रेड लेने लगता है। इससे बचने के लिए जब सब कुछ सही होने लगे, तब हमें देखना शुरू करना होगा कि हम हर बार क्यों सही हो रहे है?

46. सफल ट्रेडर जो करते है उससे वे प्यार करते है।

हर सफल ट्रेडर ट्रेडिंग की परेशानियों को हल करने में मजे करता है। अगर हम सफलता के रास्ते पर चलते समय खुश नहीं है तो हमें अपना रास्ता बदल लेना है, क्योंकि हम मंजिल पर पहुंचकर भी खुश नहीं होने वाले है।

निष्कर्ष

Unknow Market Wizards बुक समरी में हमने ट्रेडिंग की 7 बातों के 46 नियमों के बारे में जाना, ये सात बातें इस प्रकार है;

  1. ट्रेडिंग में हमें अधिकतर अपनी ट्रेडिंग साइकोलॉजी पर कार्य करना होता है।
  2. ट्रेडिंग साइकोलॉजी हमें बेहतर ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करने में मदद करती है।
  3. ट्रेडिंग जर्नल हमें अपने गलतियों में छिपे बेहतर पक्ष को जानने में मदद करती है।
  4. ट्रेडिंग सफलता रिस्क को मैनेज करने और प्रॉफिट को चलने देने से मिलती है।
  5. ट्रेड करने से पहले अपनी ट्रेडिंग कार्य योजना बनाना जरुरी होता है।
  6. रिस्क और अनुभव के अनुसार ट्रेडिंग पोजीशन को अपडेट करते रहना है।
  7. ट्रेडिंग करते समय अपनी भावनाओं में न बहना हमारी प्रोफिटेबिलिटी को बढ़ा सकता है।

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