Trade Mindfully बुक समरी में हम ट्रेडिंग धारणाओं को समझना, भावनाओं को समझना, माइंडफुलनेस तकनीकों को अपनाना, ट्रेडिंग मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया, ट्रेडिंग मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करना सीखेंगे।
लेखक Dr. Gary Dayton द्वारा लिखित Trade Mindfully बुक हमें भावनात्मक रूप से बेहतर ट्रेडिंग निर्णय लेने पर जोर देती है। यह बुक हमें बताती है कि किस प्रकार एक ट्रेडर अपने भय, लालच और चिंता के कारण ट्रेडिंग में गलत निर्णय लेता है। यह सच है कि भावनात्मक पहलुओं को नियंत्रित नहीं किया जा सकता लेकिन भावनाओं पर बेहतर प्रतिक्रिया देना हम सीख सकते है।
यह बुक हमें एक ऐसी तकनीक भी बताती है जिसे फॉलो करके हम आज में जीना सीख सकते है। साथ ही यह बुक हमें ट्रेडिंग के हर नियम को अभ्यास के द्वारा ट्रेडिंग लाइफ में उतारने पर जोर देती है।
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Trade Mindfully Book Summary Hindi |
ट्रेडिंग धारणाओं को समझना
सोचना मानव होने का एक अभिन्न अंग है। इसलिए हम सोचने के बारे में अधिक नहीं सोचते है।
कई ट्रेडर्स का मानना है कि भावनाएं ट्रेडिंग साइकोलॉजी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। हालांकि भावनाएं ही एकमात्र ऐसी चीज नहीं है जो ट्रेडिंग को प्रभावित करती है। हमारे विचार और सोचने का तरीका भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।
हम सोचने के बारे में अधिक नहीं सोचते इसलिए हमारे विश्वासों में कुछ धारणाएं और पूर्वाग्रह बन जाते है। जो ट्रेडिंग में हमें सफलता प्राप्त करने से रोकते है। जो इस प्रकार है;
- अनुमानी सोच; हम सोच विचार करने से बचने के लिए, अनुमान लगाते है। इससे बचने के लिए किसी ट्रेड सेटअप के बनने के रेश्यो पर ध्यान देना और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अपने विचारशील दिमाग को व्यस्त रखना होता है।
- अधिक आत्मविश्वास; अधिक सकारात्मक भावनाएँ असावधानी और लापरवाह ट्रेडिंग को बढ़ावा देती हैं। इससे बचने के लिए विचारशील दिमाग लगाने और नकारात्मक पक्ष की रक्षा करने पर ध्यान देना होता है।
- पुष्टि पूर्वाग्रह; एक बार जब कोई धारणा बन जाती है तो हम इसका खंडन करने के बजाय अपनी धारणा की पुष्टि करने की कोशिश करते रहते हैं। इससे बचने के लिए सक्रिय रूप से विपरीत संकेतों की तलाश करें।
- पूर्वदृष्टिकोण पूर्वाग्रह; इस पूर्वाग्रह में हम घटनाओं की घटित होने की भविष्यवाणी करते हैं। और यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि यह हम पहले से ही जानते थे। इससे बचने के लिए हमें यह समझने का प्रयास करना होगा कि बाज़ार की कोई घटना क्यों घटित हुई।
- बंदोबस्ती प्रभाव; जो पहले से ही स्वामित्व में है उसे छोड़ और अधिक की चाह की उम्मीद करना। इससे बचने के लिए एक निश्चित लाभ लक्ष्य रखें।
भावनाओं को समझना
एक ट्रेडर अपनी भावनाओं का ज्ञान न होने के कारण उन्हें कण्ट्रोल और दबाने की कोशिश करता है, और एक दिन दबे हुए विचार बाहर आ जाते हैं। जिससे ट्रेडर्स को असफलता के अलावा कुछ नहीं मिलता। इसलिए लेखक अपनी भावनाओँ को समझने पर जोर देते है।
हम सभी यह जानते है कि आंतरिक और मनोवैज्ञानिक घटनाओं पर हमारा बहुत कम नियंत्रण होता है, इसलिए हम लॉस करने और खोने के विचार पर डर और अन्य मजबूत भावनाएं प्रकट करते हैं।
लेखक हमें तीन बुनियादी क्षेत्रों में महारत हासिल करने पर जोर देते हैं। जो हमारी भावनात्मक निर्णयों को बेहतर कर सकते है जो इस प्रकार है;
- ट्रेडिंग के टेक्निकल पक्ष में सुधार करना; टेक्निकल पक्ष पर ध्यान देने से एक ट्रेडर अपने ट्रेडिंग निर्णयों को बेहतर बना सकता है, और अपनी धारणाओं और पूर्वाग्रहों से सावधानी बरतते हुए टेक्निकल एनालिसिस करने में गलतियों को कम कर सकता है।
- नुकसान से बचना; हमारी मानसिकता हमारे पास जो है उसे बचाने वाली होती है जिसके कारण हम मार्केट के losing part को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। इसलिए हमें अपने सेटअप का रिस्क टू रिवॉर्ड रेश्यो पता होना चाहिए ताकि हम यह विश्वास प्राप्त कर सके कि हम अधिकांश समय पैसा बनायेंगे।
- ट्रेडिंग प्रक्रिया पर ध्यान देना; अधिकांश लोग इस धारणा में जीते है कि वे ट्रेडिंग में अपनी भावनाओं पर अधिकार प्राप्त कर लेने के बाद उन्हें ट्रेडिंग में सफलता प्राप्त होगी। लेकिन सच तो यह है कि ट्रेडिंग प्रक्रिया पर ध्यान देने से सफलता मिलती है।
माइंडफुलनेस तकनीकों को अपनाना
इस बुक का एक महत्पूर्ण सिद्धांत माइंडफुलनेस मानसिकता विकसित करना है। यह हमें ट्रेडिंग में आत्म-जागरूकता, एकाग्रता और भावनाओं को मैनेज करने जैसे पहलुओं को विकसित करने में मदद करता है।
साथ ही यह तकनीक हमें किसी निर्णय पर लगाव रखे बिना खुलेपन, जिज्ञासा और स्वीकृति के साथ वर्तमान क्षण में जीने पर जोर देती हैं।
लेखक बताते है कि माइंडफुलनेस तकनीक का अभ्यास अनेक प्रकार से किया जा सकता है। जिसमें से कुछ तरीके इस प्रकार है;
- अपनी सांसो पर ध्यान केंद्रित करना।
- अपने विचारों को देखना।
- शरीर को बंद आँखो से स्कैन करना।
- आवाज के प्रति संवेदनशील होना।
माइंडफुलनेस अभ्यास ट्रेडर्स के तनाव लेवल को कम करने, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को मैनेज करने और मार्केट के उथल-पुथल के बीच धैर्य बनाए रखने में मदद करता हैं।
एक ट्रेडर अपनी दैनिक दिनचर्या में माइंडफुलनेस अभ्यास को शामिल करके, भावनात्मक लचीलापन और मनोवैज्ञानिक महारत हासिल कर सकता है, जिससे ट्रेड में लाभ कमाने की संभावना बढ़ जाती है।
ट्रेडिंग मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया
ट्रेडिंग करना केवल चार्ट को पढ़ने और ट्रेड को execute करने के बारे में नहीं है, यह मानसिक रूप से सोचने के तरीके और उन पर प्रतिक्रिया करने के तरीकों पर पूरी तरह निर्भर करती है।
एक ट्रेडर को ट्रेड करने के लिए, अपनी साइकोलॉजिकल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसमें भावनाओं को समझना, पूर्वाग्रह से टकराना और व्यवहारिक पैटर्न का उपयोग करना, अपनी आदतों से लड़ना जैसी प्रक्रिया शामिल है।
लेखक हमें इन मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझकर प्रतिक्रिया देने पर जोर देते है, जो इस प्रकार है;
- ट्रेडिंग भावनाओं को समझना; ट्रेडिंग में भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और बेहतर ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए हमें अपनी भावनाओं को समझना और मैनेज करना जरूरी हो जाता है।
- पूर्वाग्रह और अनुमान; पूर्वाग्रह को पहचानना और उनके प्रभाव को कम करने के लिए, हमें अपने ट्रेडिंग उद्देश्यों को बेहतर और सिंपल ट्रेडिंग निर्णयों को मार्केट में execute करना होता हैं।
- व्यवहारीक पैटर्न और ट्रेडिंग आदतें; आवेगपूर्ण व्यवहार को रोकने के लिए, ट्रिगर की पहचान करना और उनके लिए बेहतर आदतें लागू करनी होगी। ताकि हम आवेग पूर्ण निर्णयों के प्रति आत्म-जागरूकता विकसित कर सकें।
- भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास करना; अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ाकर ट्रेडर्स अधिक मानसिक लचीलापन विकसित कर सकते है, जिससे उन्हें ट्रेडिंग में होने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलती हैं।
ट्रेडिंग मनोवैज्ञानिक बढ़त
ट्रेडिंग मनोवैज्ञानिक बढ़त उस मानसिक सोच को बताती है जो ट्रेडर्स को लंबी अवधि में लगातार प्रॉफिटेबल ट्रेडिंग निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। इसमें आत्म जागरूकता, भावनात्मक नियंत्रण, लचीलापन और अनुशासन के साथ मार्केट में ट्रेड करना शामिल है।
मनोवैज्ञानिक बढ़त, एक ट्रेडर को असफल ट्रेडर्स की भीड़ से अलग करती है। मार्केट में निरंतर सफलता प्राप्त करने और ट्रेडिंग में शामिल चुनौतियों और अनिश्चितताओं पर काबू पाने के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
लेखक हमें अपनी मनोवैज्ञानिक बढ़त को बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं, जो इस प्रकार है;
- आत्म जागरूकता और माइंडफूलनेस; आत्म जागरूकता किसी चीज की ताकत, कमजोरी, पूर्वाग्रह और व्यवहार पैटर्न को समझने में मदद करती है। माइंडफूलनेस तकनीक ट्रेडर्स को वर्तमान क्षण में जीने पर जोर देती है।
- भावनात्मक नियंत्रण और अनुशासन; सफल ट्रेडर्स को अपनी भावनाओं को मैनेज करना सीखना होगा ताकि वह तनाव के समय शांत और केंद्रित रह सके। और अनुशासन हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी ट्रेडिंग निर्णय और जोखिम मैनेजमेंट सिद्धांतों का पालन करने पर जोर देता है।
- रिस्क मैनेजमेंट और लचीलापन; इसमें संभावित रिस्क को पहचाना और उसे कम करना, साथ ही अपनी कैपिटल को बचाना शामिल है। और मानसिक लचीलापन, हमें असफलताओं से उभरने की क्षमता देता है।
- लगातार सीखना और विकास की मानसिकता अपनाना; मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने वाले ट्रेडर्स आजीवन सीखने, नए ज्ञान की तलाश करने, अपने कौशल को निखारने पर जोर देते हैं।
निष्कर्ष
Trade Mindfully बुक समरी में हमने पांच महत्वपूर्ण बातें सीखी, जो इस प्रकार है;
- हमारी मानसिकता में कुछ धारणाएं और पूर्वाग्रह शामिल होते है जो हमें ट्रेडिंग में सफलता प्राप्त करने से रोकते हैं।
- ट्रेडिंग एक भावनात्मक खेल है, जिसमें अपनी भावनाओं को समझना और बेहतर प्रतिक्रिया देना शामिल है।
- माइंडफूलनेस तकनीक हमें आज में जीने के लिए प्रेरित करती है।
- ट्रेडिंग करते समय, हमें अपनी मनोवैज्ञानिक सोच और प्रक्रियाओं पर ध्यान देना होता है।
- मनोवैज्ञानिक ट्रेडिंग बढ़त हासिल करने वाला ट्रेडर लगातार सीखना जारी रखता है।