How to Stop Worrying And Start Living बुक समरी से हम वर्तमान क्षण में जीना, चिंता को मैनेज करना, सकारात्मक मानसिकता विकसित करना, आलोचना के डर पर काबू पाना, उत्पादकता और खुशहाली को बढ़ाना सीखेंगे।
लेखक Dale Carnegie दुवारा लिखित How to Stop Worrying And Start Living बुक, हमें जीने की कला सीखाती है। यह बुक हमें व्यावहारिक तरीके से अपनी चिंताओं को छोड़ने और अधिक सकारात्मकता के साथ अपने कार्यों को करने पर जोर देती है। यह बुक हमें चिंता के कारणों से लेकर, उनके प्रभावों, आदतों, मानसिकताओं और परेशानियों के बारे में भी बताती है। साथ ही हमें चिंता से निपटने के कई तरीके भी देती हैं।
यह बुक हमें कोई दवाई नहीं देती है अपनी चिंताओं से निपटने के लिए, बल्कि यह हमें चिंता के कारणों को जानने और उस पर काम करने पर जोर देती है।
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How To Stop Worrying And Start Living Book Summary Hindi |
वर्तमान क्षण में जीना
जो हमारे बस में नहीं, उस पर पछताने और चिंता करने से, जो हमारे बस में हैं उसे भी नष्ट कर लेते हैं।
लेखक हमें अतीत की बातों पर पछताने और भविष्य के बारे में चिंता न करने पर जोर देते हैं। क्योंकि अतीत को कोई नहीं बदल सकता और ना ही भविष्य को। इसलिए हमारे पास केवल आज का समय और पल है, जिसे हम अपने अनुसार बना और बिगाड़ सकते हैं।
मानव स्वभाव के बारे में सबसे दुखद चीजों में से एक यह है कि हम सभी आज को जीना छोड़ देते हैं। हम सभी आज अपनी खिड़कियों के बाहर खिल रहे गुलाबों का आनंद लेने के बजाय, आसमान में खिला किसी जादुई गुलाब के सपनें देखते रहते हैं।
चिंताओं से निपटने के लिए अनेक व्यावहारिक तकनीकी प्रदान करते हैं जिसमें मेडिटेशन करना, गहराई से सांस लेना, प्रकृति को निहारना आदि शामिल है जो हमें व्यर्थ की चिंताओं से दूर रखती है, और हमारे मन को खुशी और संतुष्टि प्रदान करती है। जिससे हम वर्तमान पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए अगर हमें कोई प्रेजेंटेशन एक हफ्ते बाद देनी है तो मैं इसे नहीं दे सकता या मैं कैसे प्रेजेंटेशन दूंगा, यह सोचने के बजाय हम उसकी तैयारी कर सकते हैं। अगर हमने कोई प्रेजेंटेशन दे दी है, पर वह खराब हो गई तो हम आने वाली प्रेजेंटेशन को बेहतर करने की तैयारी में लग सकते हैं ना की पुराने प्रेजेंटेशन पर पछताते रहें।
चिंता को मैनेज करना
चिंता हमारे मानव स्वभाव का एक स्वाभाविक हिस्सा है। जो हमें बताती है कि कुछ काम करना है, या कुछ काम गलत हुआ है। लेकिन इस पर अधिक जोर देने से हम अपने कार्यों के प्रति ज्यादा नकारात्मक भावनाएं पैदा कर सकते हैं। इसलिए चिंता को मैनेज करना जरूरी हो जाता है।
निष्क्रियता, संदेह और भय को जन्म देती है। कार्य आत्मविश्वास और साहस को जन्म देता है। यदि हम डर पर सफलता पाना चाहते हैं, तो घर बैठकर इसके बारे में न सोचें, बाहर निकलिये और व्यस्त हो जाइये।
लेखक चिंता को मैनेज करने के कई तरीके बताते है जिसमें से दो तरीके हमने आपके सामने रखे है, जो की इस प्रकार है;
- समस्या समाधान की विचारधारा को अपनाना; इसमें हम किसी कार्य के प्रति उसकी समस्या और समाधान पर अधिक जोर देना होता है, ना कि पूरे दिन उसके बारे में सोचने में।
- मानसिक घरेलू सफाई का अभ्यास करना; जिसमें चिंता और चिंताओं के कारण लिखने और उन्हें व्यवस्थित करने पर जोर देते हैं। जिससे हम अपनी चिंताओं के बारे में बेहतर तरीके से जान सके और वह तरीका ढूंढ सके, जिससे उन्हें कम किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति अपने पैसे को लेकर चिंतित है तो उसे अपने पैसे का बजट बनाना और उसे मैनेज करना सीखना होगा। जिससे उसकी पैसे की चिंता कम हो जाएगी।
सकारात्मक मानसिकता विकसित करना
हम जिस तरह से सोचते हैं और दुनिया को समझते हैं, उसका हमारी मानसिकता और भावनात्मक विकास में बहुत प्रभाव पड़ता है। इसलिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से हम चिंताओं पर काबू पाना और अपने जीवन को बेहतर बनाना सीख सकते हैं।
लेखक सकारात्मक मानसिकता विकसित करने के सात सिद्धांत बताते हैं, जो इस प्रकार है;
- अपने दिमाग को रचनात्मक विचारों से भरे।
- खुद को सकारात्मक प्रभाव के घेरे में रखें।
- अपने आशीर्वाद गिने।
- सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करें। सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करके हम चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास पाते है।
- सफलता की कल्पना करें।
- दूसरों के लिए दयालुता और उदारता का अभ्यास करें।
- छोटी-छोटी बातों पर समय और ऊर्जा बर्बाद ना करें।
एक सकारात्मक दृष्टिकोण न केवल मानसिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ाता है बल्कि विकास और पूर्ति के लिए नए अवसर और संभावनाओं के द्वार भी खोल देता है।
उदाहरण के लिए हमें अपनी असफलताओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अपनी ताकतों और पिछली सफलताओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। जिससे हमें हम कर सकते हैं की भावना प्राप्त हो और हम सफलता की ओर आगे बढ़ते रहें।
आलोचना के डर पर काबू पाना
आलोचना का डर कई व्यक्तियों के लिए चिंता और बेचैनी का एक सामान्य स्रोत है। क्योंकि सामने वाला भी नहीं जानता कि जो बात वह कह रहा है उसे हम आलोचना के रूप में देखेंगे या एक अवसर के रूप में।
लेखक आलोचना के डर पर काबू पाने के लिए चार रणनीतियाँ बताते हैं, जो इस प्रकार हैं;
- आत्मविश्वास और लचीलापन पैदा करना; हमारे अंदर कुछ कमजोरियां और कुछ ताकतें होती है। लेखक हमें अपनी कमजोरियों पर काम करने और अपनी ताकतों के बारे में और अधिक जानने पर जोर देते हैं।
- विकास की मानसिकता अपनाना; हम आलोचना को हमले की जगह सीखने के अवसर के रूप में भी देख सकते हैं। क्योंकि ऐसे बहुत कम लोग मिलते हैं जो हमारे अंदर कमियां दिखाने का साहस रखते हैं।
- आलोचनाओं पर ध्यान न देना; हर आलोचना पर ध्यान देना जरूरी नहीं होता इसलिए हमें इन्हें छोड़ना भी सीखना होगा। जिससे जब हमारी कोई आलोचना करता है तो हम उस पर क्रोधित ना हो और अपने काम पर ध्यान दे सकें।
- आलोचना के कारण पर ध्यान दें; आलोचना का कारण हमें बेहतर बनने में मदद करता है। लेकिन कभी-कभी सामने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व ही आलोचक होता है जिसके कारण वह हमारी आलोचना कर रहा होता है।
उदाहरण के लिए, यदि हम कोई रचनात्मक काम करते हैं और उसमें गलतियां निकलती है। तब कोई दूसरा हमारी आलोचना करता है तब हमें उस व्यक्ति पर हमला करने के बजाय, उस आलोचना से सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।
उत्पादकता और खुशहाली को बढ़ाना
आज वह कल है जिसकी हमें कल चिंता थी।
चिंता और पछतावे पर अधिक ध्यान देने से हम अपनी उत्पादकता और खुशहाली को नष्ट कर देते हैं। क्योंकि हमारे पास उनके लिए सोचने का वक्त ही नहीं होता है। लेखक अपने नजरिए को बदलने पर अधिक जोर देते हैं।
उत्पादकता और खुशहाली बढ़ाने के तीन सिद्धांत इस प्रकार हैं;
- अपने समय को मैनेज करना; लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि अपने कामों को व्यवस्थित करके उन्हें एक-एक कर समय देते रहें ताकि वह पूरे हो सके। जिससे हमारी सफलता की उम्मीदें बढ़ जाती है और हमें अधिक चिंता और पछताने की आवश्यकता भी नहीं होती है।
- खुद के प्रति सचेत रहना; लेखक हमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देने पर जोर देते हैं जिसमें नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और ध्यान या गहरी सांस लेना जैसी क्रियाएं शामिल है।
- सकारात्मक आदतें और दिनचर्या विकसित करना; लेखक अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए दैनिक दिनचर्या और आदतों का सहारा लेने पर जोर देते हैं। जिससे हम स्वस्थ आदतें और दिनचर्या बनाकर जीवन के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
How To Stop Worrying And Start Living बुक समरी में हमने पांच महत्वपूर्ण बातें सीखी जो इस प्रकार है;
- चिंताओं से निपटने के लिए हमें वर्तमान क्षण में जीना सीखना होगा।
- किसी काम के प्रति चिंता होना स्वाभाविक है लेकिन अधिक इस पर ध्यान देने से उस काम की ऊर्जा को नष्ट कर सकती हैं।
- सकारात्मक मानसिकता विकसित करने से हम अपने काम पर अधिक ध्यान देते हैं ना की चिंताओं पर।
- आलोचना का डर हमारे भविष्य को नष्ट भी कर सकता है और बना भी सकता है।
- उत्पादकता और खुशहाली बढ़ाने के लिए हमें अपने घर से बाहर निकलना होगा और अपने कामों में व्यस्त हो जाना होगा।