Trading in The Zone Book Summary Hindi

Trading In The Zone बुक में हम ट्रेडिंग सफलता का रास्ता ढूंढना, अपने ट्रेड की जिम्मेदारी लेना, संभावनाओं में सोचना, अपने बिहेवियर के प्रभाव को जानना, और एक ट्रेडर की तरह सोच रखना सीखेंगे।

लेखक Mark Douglas द्वारा लिखित Trading In The Zone बुक ट्रेडर्स को भावनात्मक पहलुओं पर मास्टर बनने की ओर आकर्षित करती है। यह बुक हमें बताती है कि ट्रेडिंग करना एक मनोवैज्ञानिक खेल है। ट्रेडिंग में ट्रेडर्स की भावनाएं अधिकतर प्रॉफिट और लॉस का कारण बनती हैं। यह बुक ट्रेडिंग के उन पहलुओं पर भी बात करती है जिसे ट्रेडिंग से दूर रखना और जिसका हमें ट्रेडिंग में उपयोग करना है।

यह याद रखिए, मानसिकता एक-दो दिन में नहीं बनाई जाती, इसे बनाने के लिए कई महीने और साल लग जाते हैं। यह अभ्यास और बार-बार दोहराव के द्वारा विकसित की जाती है।


Trading in The Zone Book Summary
Trading in The Zone Book Summary Hindi

ट्रेडिंग सफलता का रास्ता

हम मार्केट का तीन प्रकार से विश्लेषण कर सकते है, और जरूरत के अनुसार हम इन तीनों का उपयोग करते हैं।

  1. फंडामेंटल विश्लेषण
  2. टेक्निकल विश्लेषण
  3. मानसिक विश्लेषण

न्यू ट्रेडर्स की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि उन्हें यह नहीं पता होता कि उनकी मानसिकता किस प्रकार की हैं। और वे कौन-सा रास्ता अपना कर मार्केट से पैसा बना सकते हैं। इसीलिए वे सभी रास्तों को एक साथ उपयोग करने लगते हैं। इससे वे पूरी तरह दुविधा में फंस जाते हैं, और अक्सर गलत निर्णय लेते हैं।

मार्किट में, हम तीनों विश्लेषण को फॉलो करके पैसा बना सकते हैं, और तीनों ही ट्रेडिंग के लिए उपयोगी हैं। लेकिन उपयोग करने का तरीका अलग-अलग है।

अगर हम लंबे समय तक मार्केट में बने रहना चाहते हैं या हम निवेश करना चाहते हैं तो हमें फंडामेंटल पर ध्यान देना होगा। वही, हम स्विंग ट्रेडिंग या डे ट्रेडिंग करने की इच्छा रखते हैं तो हमें टेक्निकल और मानसिक विश्लेषण पर ज्यादा ध्यान देना होगा।


ट्रेड की जिम्मेदारी लेना

जब हम कोई काम करते हैं तो वह हम स्वयं करते हैं, इसलिए उस काम का जो भी परिणाम होगा उसे स्वीकार करना ही जिम्मेदारी लेना कहलाता है। यह गलतियों से सीखना आसान कर देता है।

न्यू ट्रेडर्स हमेशा जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। क्योंकि हम अधिकतर कामों में यह नहीं सिखते है इसलिए ट्रेडिंग में हमें यह नहीं पता चलता कि जिम्मेदारी लेना जरूरी है। इसके कारण न्यू ट्रेडर्स अक्सर मार्केट और अपने सिस्टम को दोष देते हैं।

जब मार्केट में उन्हें लॉस होता है तो वे कारण जानने और बेहतर करने की जगह दूसरों को दोष देते हैं। एक समय था जब मैं भी यही किया करता था, क्योंकि मुझे स्वयं जिम्मेदारी लेने में (मैं गलत नहीं हो सकता कि भावना और आलोचना का डर) रोकते थे लेकिन अब नहीं।

किसी काम की, हम स्वयं जिम्मेदारी लेते हैं तो हम यह मानते हैं कि जो भी होगा उसे हम स्वीकार करेंगे। ऐसा इसलिए भी कि मार्केट में कब प्रॉफिट होगा और कब लॉस होगा, यह हम नहीं जानते हैं।

एक ट्रेडर को हर प्रकार की संभावनाओं को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना होगा। यह हमें दूसरों पर दोष देने से बचाता है, और अपनी गलतियों से सीखने की ओर हमें आकर्षित करता है।


संभावनाओं में सोचना

ट्रेडिंग में किसी सेटअप से 10 ट्रेड लेने पर, कितनी बार हमें प्रॉफिट मिलेगा और कितनी बार लॉस होगा, इसी को उस सेटअप की संभावना कहते हैं। ट्रेडिंग संभावनाएं ट्रेडर की मानसिकता और उसके सिस्टम पर निर्भर होती हैं।

एक न्यू ट्रेडर यह नहीं सोचता कि वह जिस सेटअप को ट्रेड कर रहा है, उसके बनने और काम करने की संभावना कितनी है? और वह कितनी बार प्रॉफिट बनाएगा और कितनी बार लॉस करेगा।

लेखक बताते हैं कि न्यू ट्रेडर्स संभावनाओं में न सोचने के कारण अपने अच्छे सिस्टम को भी छोड़ देते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि ट्रेडिंग में सफलता के लिए सौ प्रतिशत सही सेटअप होना आवश्यक है।

ट्रेडिंग संभावनाओं को बढ़ाने के लिए दो चीज आवश्यक है; पहली हमारी मानसिकता और दूसरी हमारा सिस्टम। एक ट्रेडर की मानसिकता सिस्टम के अनुसार होनी जरुरी है।

अगर सिस्टम में कहीं पर एंट्री और कहीं पर एग्जिट है तो उसे पूर्ण रूप से फॉलो करना होता है। दूसरी ओर हमारा, सिस्टम का रिस्क-टू-रिवॉर्ड रेशों कितना है और कितनी उसके चलने की संभावना है यह पता होना आवश्यक है।


ट्रेडिंग पर बिहेवियर का प्रभाव

किसी काम को लेकर हमारा सोचने का तरीका और कोई घटना होने पर उस पर प्रतिक्रिया देने का तरीका व्यवहार कहलाता है। जब ट्रेडिंग और हमारा व्यवहार एक हो जाते हैं तभी हम मार्केट से पैसा बना सकते हैं।

एक न्यू ट्रेडर यह नहीं जानता कि मार्केट में उसकी मानसिकता पूरी तरह असर डालती है, इसलिए न्यू ट्रेडर्स अक्सर फेल हो जाते हैं और मार्केट को छोड़ देते हैं।

जब न्यू ट्रेडर की मानसिकता से अलग जब उसे मार्केट की मानसिकता स्वीकार करनी होती है। या उसे अपनी मानसिकता, मार्केट की मानसिकता के अनुसार ढालनी होती है तो वह यह नहीं कर पाता है, यही उसकी असफलता का कारण बनता है।

एक ट्रेडर बनने के लिए, ट्रेडर की मानसिकता को अपनाना और उसे मार्केट में उपयोग करना दोनों आवश्यक है। ट्रेडिंग की मानसिकता, काम करने और ट्रेडिंग में प्रतिदिन होने वाली प्रॉफिट और लॉस से बनती है।

अगर हम भावनात्मक रूप से इन्हें स्वीकार नहीं कर पाते हैं तो हमारी मानसिकता एक दिन हमारा व्यवहार बन जाती है। अच्छी बात यह है कि हम मार्केट के बिहेवियर को स्वीकार करना सीख सकते हैं।


ट्रेडर की तरह सोचना

कहते हैं हम जैसा सोचते हैं और जैसा करते हैं, एक दिन वैसे बन जाते हैं। इसलिए अगर हमारी ट्रेडर बनने की इच्छा है तो हमें एक ट्रेडर की सोचना और उसकी तरह व्यवहार करना होगा।

ट्रेडिंग में अनुभव न होने के कारण हम गलतियां करते हैं। जैसे

  1. सही से होमवर्क ना करना।
  2. होमवर्क करने पर हमें ट्रेड नहीं मिलता तो कहीं पर भी ट्रेड ले लेना।
  3. अपने सिस्टम को चलते मार्केट में बदल देना।
  4. खुद पर यह विश्वास न होना कि अपना सिस्टम काम करता है।
  5. मार्केट को न देखकर लोगों की सुनना।
यह सभी गलतियां इसलिए होती है क्योंकि एक न्यू ट्रेडर यह नहीं समझ पाता है कि ट्रेडर की तरह व्यवहार करना है या जुवारी की तरह।

एक ट्रेडर की तरह सोच रखने से,हमें ट्रेडिंग की मानसिकता विकसित करने में ज्यादा समय नहीं लगता है। क्योंकि एक ट्रेडर की तरह सोचने और काम करने से अधिकतर परेशानियों का हल मिल जाता है। जैसे

  1. एक ट्रेडर अपने सिस्टम को हमेशा टेस्ट करता है।
  2. गलतियां होने पर अपने सिस्टम को अपडेट करता है ना कि उसे छोड़ देता है।
  3. अपने बनाए हुए रूल्स मार्केट के समय में नहीं तोड़ता।

निष्कर्ष

Trading in The Zone बुक समरी से हमने पांच बातें सीखी, जो इस प्रकार हैं।

  1. ट्रेडिंग सफलता के तीन रास्ते हैं, और हम तीनों से पैसे बना सकते हैं।
  2. हर ट्रेड के परिणाम की जिम्मेदारी लेने से, उस ट्रेड से सीखना आसान हो जाता है।
  3. ट्रेडर को हमेशा संभावनाओं में सोचना होगा।
  4. अपने ट्रेडिंग बिहेवियर को कभी नजर अंदाज न करें।
  5. हम जैसी सोच रखते हैं और जैसा काम करते हैं एक दिन वैसे बन जाते हैं।

END

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