The Intelligent Investor बुक हमें यह बात अच्छे से समझाती है कि निवेश एक सरल और जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि जो लोग भाग्यशाली होते है उन्हें निवेश के सिद्धांत जल्दी समझ में आ जाते है। वे अपने अनुभव के अनुसार, अपने जीवन में लागू करने का बार-बार प्रयास करते है। वही बाकी लोगों को ये सिद्धांत समझने में वर्षों लग जाते है।
लेखक Benjamin Graham द्वारा लिखित द इंटेलीजेंट इन्वेस्टर बुक बेस्ट इन्वेस्टिंग मार्गदर्शक किताबों में से एक है। बेस्ट किताबें हमें सलाह नहीं देती बल्कि कार्य करने की ओर ले जाती है। यह बुक हमें उन रहस्यों के बारे में बताती है जो मार्केट में छुपे है और जिन्हें जानने के लिए हमें बहुत मेहनत और भाग्य की आवश्यकता होती है। यह बुक इस बात को भी अच्छे से उजागर करती है कि भविष्य हमेशा आश्चर्यचकित कर देने वाला होता है इसलिए हमें हर परिणाम के लिए तैयार रहना होगा।
यह बुक हमें इन 13 बातों को जानने की ओर आकर्षित करती है;
- निवेश और ट्रेडिंग दोनों अलग-अलग है।
- निवेशक को, महंगाई को भी ध्यान में रखकर अपने निवेश को कैलकुलेट करना होगा।
- रक्षात्मक निवेशक के लिए मूल्य धन की सुरक्षा फर्स्ट प्रायोरिटी होती है।
- रक्षात्मक निवेशकों को अपना पैसा बांड और शेयर में बाटकर, निवेश करना है।
- उद्यमशील निवेशक एक्टिव होकर बेहतर निवेश की तलाश करते है।
- उद्यमशील निवेशक को उन शेयर पर ध्यान देना होगा जिसमें कुछ गलत हो।
- निवेशक को प्रॉफिट और लॉस के साथ मार्केट के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए भी तैयार रहना होगा।
- जो लोग अपने निवेश के लिए समय नहीं निकाल सकते, उनके लिए निवेश फण्ड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
- निवेशक की सफलता के लिए यह जरुरी होता है कि वह किनसे सलाह लेता है।
- सिक्योरिटी एनालिस्ट स्टॉक को समझने में साधारण निवेशक की मदद करते है।
- कंपनी में होने वाली अजीब घटनाओं पर ध्यान दे।
- कंपनी के ग्रोथ में डिविडेंड पॉलिसी भी एक महत्पूर्ण भूमिका निभाती है।
- निवेशक किसी सिक्योरिटी को खरीदने में कितना पे करता है यह लाभ कमाने के लिए महत्वपूर्ण है।
निवेश बनाम ट्रेडिंग
निवेश वह क्रिया है जिसमें एनालिसिस के माध्यम से मूल पूंजी की सुरक्षा और उचित रिटर्न को तय किया जाता है। जिन कार्यों में इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती वह ट्रेडिंग कहलाती है।
अच्छी हो या बुरी, जुए की प्रवृत्ति मानव स्वभाव का एक हिस्सा है। अधिकांश लोगों के लिए इसे रोक पाने की कोशिश करना ही व्यर्थ है लेकिन हमें इसे रोकना और नियंत्रित करना होगा। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम खुद को इस भ्रम से दूर रखे कि ट्रेडिंग और निवेश दोनों एक ही है।
इंटेलीजेंट इन्वेस्टर की तरह इंटेलिजेंट ट्रेडर भी होता है लेकिन ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनमें स्पैक्यूलेशन बुद्धिमानी भरा नहीं होता जैसे;
- ट्रेडिंग करते हुए इसे निवेश समझना।
- पर्याप्त ज्ञान और कौशल ना होने के बावजूद, ट्रेडिंग को गंभीरता से लेना।
- जितना नुकसान सह सकते हैं उससे ज्यादा धन ट्रेडिंग में लगाना।
निवेशक और महंगाई
निवेश में सफलता का पैमाना इस बात से नहीं नापा जाता कि हमने कितना कमाया है बल्कि महंगाई के बाद कितना बचता है इस बात से नापा जाता है।
महंगाई एक ऐसा अदृश्य जादू है जो हमारे सामने से हमारे पैसे की खरीदने की क्षमता चुरा लेता है और हमें पता भी नहीं चलता। महंगाई बढ़ने का मतलब है हमारी जीवन लागत बढ़ना और जीवन लागत बढ़ने से हमें पहले से अधिक पैसा बनाना होगा।
जहां थोड़ी महंगाई से कंपनियों को अपने कच्चे माल की बढ़ती कीमत को, ग्राहकों पर डालने का मौका मिल जाता है, वहीं अधिक महंगाई से विनाश होता है। जिससे ग्राहक को मजबूरन अपनी खरीद में कटौती करनी पड़ती है और पूरी अर्थव्यवस्था में मंदी दिखने लगती हैं।
इससे बचने के लिए हम दो प्रकार से निवेश कर सकते है।
- ऐसी कंपनियो में निवेश करना जो व्यावसायिक या आवासीय संपत्तियों की स्वामी होती है और इनसे किराया वसूलती हैं।
- Treasury Inflation या भारत में Inflation Indexed Bond में निवेश करना।
रक्षात्मक निवेशक
इच्छित रिटर्न इस बात पर निर्भर करते है कि निवेशक कितनी बुद्धिमानी से प्रयास करना चाहता है और अपने काम के लिए कितनी मेहनत करता है। न्यूनतम रिटर्न निष्क्रिय निवेशकों को मिलता है जो चिंताओं से सुरक्षा और मुक्ति दोनों चाहते है। अधिकतम रिटर्न उधमशील निवेशक को मिलता है जो अधिकतम बुद्धिमानी और कौशल का उपयोग करता है।
रक्षात्मक निवेश के लिए अपनी मूलधन की सुरक्षा पहली प्रायोरिटी होती है नाकि बहुत अधिक पैसा बनाना। इसलिए हम बांड और शेयर्स में इस प्रकार से निवेश करते है ताकि शेयर्स मार्केट में कोई बड़ी हलचल से हमें अधिक नुकसान न उठाना पड़े।
निवेशक को अपने फंड का 25% से कम और 75% से अधिक साधारण शेयर्स में निवेश कभी नहीं करना है और बांड में इसके उलट 75% से 25% की रेंज रखनी है। इसका मतलब यह है कि इन दोनों निवेश माध्यमों में बराबर निवेश करना है।
मान लेते है कि बाजार के स्तर में बदलाव होता है और हमारे शेयर्स का रेश्यो 55% बढ़ जाता है तब हम अपने पोर्टफोलियो के 11वें हिस्से को बेच कर यह राशि बांड में निवेश कर देना है। इसके विपरीत जब साधारण शेयर्स रेश्यो गिरकर 45% हो जाए तो बांड फंड का 11वीं हिस्से को बेचकर इसे शेयर खरीदने में उपयोग कर सकते है।
रक्षात्मक निवेशकों के लिए शेयरों का चुनाव
रक्षात्मक निवेशकों के पोर्टफोलियो के लिए, साधारण शेयर्स का चयन तुलनात्मक रूप से सरल प्रकृति का होना चाहिए। यहां हम इन चार नियमों को फॉलो करके कर सकते है;
- चुनाव की हर कंपनी बड़ी और फाइनेंसियली मजबूत हो।
- विविधीकरण बहुत अधिक नहीं लेकिन पर्याप्त रूप से रखना है। इसका मतलब 10 भिन्न शेयर्स में या अधिकतम 30 तक शेयर्स में निवेश करना।
- कंपनी का कम से कम बीस वर्ष का डिविडेंड भुगतान रिकॉर्ड हो।
- पिछले 10 वर्षों में, हर तीसरे साल प्रति शेयर आय कम से कम एक तिहाई बड़ी हो।
- किसी शेयर्स के लिए भुगतान किया जाने वाला भाव पिछले 12 माह की अवधि से 20 गुना से अधिक न हो।
- वर्तमान भाव अंतिम रिपोर्ट बुक वैल्यू से 1.5 से अधिक न हो।
उद्यमशील निवेशक
एक उधमशील निवेशक वह नहीं होता जो औसत से अधिक जोखिम लेता हो। ना ही वह जो आक्रमक विकास का दावा करने वाले स्टॉक को खरीदता है। एक उधमशील निवेशक वह है जो अपने पोर्टफोलियो पर रिसर्च करने के लिए अतिरिक्त समय देने लिए तैयार रहता है।
एक उधमशील निवेशक चार बातों पर ध्यान रखता है इसी के अनुसार वह किसी कंपनी का एनालिसिस करता है। जो इस प्रकार है;
- गिरते बाजार में खरीदना और चढ़ते बाजार में बेचना।
- सावधानी से चुने गए ग्रोथ स्टॉक को खरीदना।
- विभिन्न प्रकार के बार्गेन इश्यू खरीदना।
- खास हालत में खरीदारी करना।
उद्यमशील निवेशक के लिए शेयरों का चुनाव
एक इंटेलीजेंट इन्वेस्टर शेयर्स को अपने पास केवल तब तक रखता है, जब तक वे सस्ते है और तभी बेचेगा जब उसके भाव बढ़ जाए और इसके बाद वह तब बांड और नगद के बंकर में छुपा बैठा रहता है, जब तक की खरीद की दृष्टि से शेयर फिर से सस्ते ना हो जाए।
उधमशील निवेशकों के शेयर्स चुनने के कुछ नियम इस प्रकार है;
- कुल वर्तमान लायबिलिटी, कुल वर्तमान एसेट से 2.5 गुना से कम हो।
- कंपनी का कर्ज उसके एसेट से 110% से ज्यादा न हो।
- कंपनी ने बीते पांच वर्षों का कोई घाटा कवर नहीं किया हो।
- वर्तमान में कुछ डिविडेंट पे करती हो।
- पिछले वर्ष की आय से इस वर्ष अधिक हो।
- कंपनी का भाव उसके रियल वैल्यू से 120% से कम हो।
पिछला डाटा देखें तो 10% बड़ी कंपनियां अपनी आय में कम-से-कम लगातार 5 वर्षों तक 20% का इजाफा करती है और उनमें से केवल 3% से कम 10 वर्षों तक सतत रूप से 20% की वृद्धि हासिल करती है और एक भी कंपनी सतत रूप से 15 वर्ष तक ऐसा नहीं कर पाती है।
निवेशक और बाजार की अस्थिरता
सभी शानदार चीजें उतनी ही कठिन होती है जितनी की दुर्लभ होती हैं।
अस्थिरता के दो प्रमुख कारक इस प्रकार है;
- शेयर बाजार कभी पूरी तरह गलत नहीं होता।
- वर्ष बीतने के साथ ही ज्यादातर कारोबारों का चरित्र और गुणवत्ता बदल जाते हैं।
तेजी के लगभग सभी बाजारों में काफी कुछ विशेषताएं एक समान थी जैसे;
- ऐतिहासिक रूप से उच्च भाव स्तर।
- हाई प्राइस अर्निंग रेशों।
- बांड यील्ड के मुकाबले कम लाभांश शील्ड।
- मार्जिन पर अत्यधिक स्पैक्यूलेशन।
इंटेलीजेंट इन्वेस्टर दो प्रकार से अस्थिरता से फायदा उठा सकता है;
- टाइमिंग का तरीका; जब भविष्य में इसके बढ़ने की आशा हो तो खरीदा जाए या रखा जाए और जब गिरावट का रुख हो तो बेचा जाए या खरीदने से बचा जाए।
- प्राइसिंग का तरीका; शेयर्स को तब खरीदने का प्रयास करें जब भी अपने फेयर प्राइस से नीचे के भाव पर हो और उन्हें तब बेचा जाए जब वह ऐसे मूल्य से अधिक हो।
इन्वेस्टमेंट फंड में निवेश
म्युचुअल फंड प्रदर्शन के बारे में कुछ बातें इस प्रकार है;
- औसत फंड में शेयर्स को इस तरह भली भाती नहीं चुना जाता कि इसके शोध और सौदे की लागत पुरी की जा सके।
- फंड का खर्च जितना अधिक होगा उसका रिटर्न उतना ही कम होगा।
- जो फंड अपने स्टॉक का जितना ज्यादा सौदा करेगा उसकी कमाई का रुख उतना ही कम होता जाएगा।
- उच्च अस्थिरता वाले फंड जिसमें औसत से अधिक उतार-चढ़ाव आता हो, उनके अस्थिर रहने की संभावना रहती है।
- अतीत में उच्च रिटर्न देने वाले फण्ड के लंबे समय तक विजेता बने रहने की संभावना नहीं होती है।
इंडेक्स फंड को मात देने वाले फण्ड मैनेजर की कुछ विशेषताएं इस प्रकार है;
- उनके मैनेजर सबसे बड़े शेयर धारक होते हैं।
- ये फण्ड सस्ते होते हैं।
- ये फण्ड भिन्न होने का साहस रखते हैं।
- वे नए निवेशकों के लिए दरवाजा बंद रखते हैं।
- वे विज्ञापन नहीं करते हैं।
हमें कब किसी फण्ड में निवेश करने से बचना चाहिए इसके कुछ संकेत इस प्रकार है;
- रणनीति में तेज और अप्रत्याशित बदलाव।
- खर्चे में वृद्वि।
- बड़े और नित्य टैक्स बिल।
- अचानक रिटर्न अनियमित होना।
निवेशक और उनके सलाहकार
हम सलाहकार रखते है अपने धन को मैनेज करने के लिए नहीं बल्कि खुद को मैनेज करने के लिए।
निवेश सलाह कई जगह से मिल सकती है जो इस प्रकार है;
- परिजन या दोस्त, जिसे संभवत परिभूतियों की समझ हो।
- स्थानीय बैंकर।
- ब्रोकरेज फार्म या इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हाउस।
- वित्तीय सेवा या पत्रिका।
- निवेश सलाहकार।
2002 के सर्वे के अनुसार 17% निवेशक अपने जीवनसाथी या मित्र पर निवेश सलाह के लिए सबसे अधिक निर्भर थे। वहीं एक बैंकर पर 2% निवेशक और एक ब्रोकर पर 16% निर्भर थे। ग्राहम के दिनों से अब तक यही अंतर आया है कि 24% इंटरनेट पर और 3% फाइनेंसियल टीवी कार्यक्रमों पर निर्भर है।
यह याद रखें कि अच्छे वित्तीय सलाहकार पेड़ों पर नहीं उगते। अक्सर, सबसे अच्छे वित्तीय सलाहकार के पास उतने ग्राहक पहले ही होते हैं, जितने वे संभाल सकते हैं, और वे हमें केवल तभी लेंगे, जब हम उनके अनुकूल लगते हो। इसीलिए जो वित्तीय सलाहकार हम में दिलचस्पी नहीं रखता उससे दूर रहे तो ज्यादा अच्छा है।
साधारण निवेशक के लिए सिक्योरिटी एनालिस्ट
सिक्योरिटी एनालिस्ट किसी भी सिक्योरिटी के बारे में चार प्रकार से मदद करता है;
- सिक्योरिटी की कमजोरियां और रिस्क को मैनेज करने में।
- सिक्योरिटी के बारे में सर्वोत्तम अंदाजा लगाने में।
- समान और भिन्न कंपनीयो की तुलना करने में।
- अंत में बेहतर सिक्योरिटी पर अपनी राय देने में।
ग्राहम के अनुसार एक साधारण निवेशक के लिए यह पांच बातें निर्णायक होती है; जो इस प्रकार है;
- कंपनी की दीर्घावधिक संभावनाएं।
- कंपनी के मैनेजमेंट की गुणवत्ता।
- कंपनी की फाइनेंसियल पावर और मैनेजमेंट।
- कंपनी की वर्तमान लाभांश दर।
निवेश न करने की चार वजह
चार महत्वपूर्ण सिख इस प्रकार हैं;
- ओवर प्राइस लड़खड़ाता दिग्गज; कंपनी की रिपोर्ट में झोल होने के बाद भी कंपनी की ग्रोथ नजर आ रही है तो हमें उस कंपनी से दुरी बनाना शुरू कर देना है क्योंकि आज नहीं तो कल यह झोल लोगों के सामने आ ही जायेगे।
- अंपायर बनाने वाला कंपनी समूह; कर्ज लेने और चुकाने में मैनेजमेंट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर मैनेजमेंट अपने कर्ज को बढ़ाता जा रहा है और अपने कर्ज को चुकाने के लिए भी दूसरे कर्ज ले रहा है तो उसका कंपनी का देर-सबेर कोई भविष्य नहीं होगा।
- ऐसा विलियन जहां छोटी फॉर्म बड़ी का अधिग्रहण करें; किसी कंपनी को अपने साथ मिलाने का एक साधारण नियम यह है कि हम उससे ज्यादा ताकतवर हो। अगर ऐसा नहीं है तो हमें बढ़ी वेल निगलने में देर नहीं करेगी।
- मूल रूप से बेकार कंपनी का शुरुआती आईपीओ; किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति जाने बिना उसमें निवेश करना कुछ समय को खुशी देता है लेकिन अंत में लॉस के आलावा कुछ नहीं मिलता।
डिविडेंड पॉलिसी
शेयरधारकों को अपने मैनेजमेंट से मांग करनी चाहिए कि या तो आय का सामान्य भुकतान करे, यह आय के दो-तिहाई तक हो सकती है या साफ तौर पर स्पष्टीकरण दे कि पुनः निवेशित मुनाफे से प्रति-शेयर आय कितनी वृद्धि हुई है।
जब वर्तमान डिविडेंड उच्च होता है तो ऐसा ही भावी आय में भी होता है। जिन कंपनियों ने अपना डिविडेंड बढ़ाया, उन्हें बेहतर स्टॉक रिटर्न हासिल हुआ।
डिविडेंड के विपरीत, यह बेहतर है, क्योंकि वापस खरीदने पर उन निवेशकों को टैक्स नहीं लगता जो अपने शेयर बेचते नहीं है। इस तरह, इससे टैक्स का बिल बढ़े बिना उनका स्टॉक का मूल्य बढ़ जाता है। और शेयर सस्ते हो, तब इन्हें वापस खरीदने में अतिरिक्त नकद को खर्च करना कंपनी की पूंजी को सर्वोत्तम उपयोग है।
मार्जिन ऑफ सेफ्टी
मार्जिन ऑफ सेफ्टी, निवेश के संदर्भ में आमतौर पर उस अंतर को कहा जाता है जो किसी स्टॉक के आंतरिक मूल्य और उसके बाजार मूल्य के बीच होता है, या फिर यह कितनी हद तक कोई स्टॉक अपने जोखिम के मुकाबले कम पर प्राइस ख़रीदा जाता है।
एक उदाहरण इस प्रकार है;
मान लेते है कि स्टॉक की अपेक्षित आय (Earning potential) 9% (जो स्टॉक निवेशक को अपेक्षित रिटर्न है) और बांड की दर (Bond rate) 4% (जो अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश, जैसे सरकारी बांड, से मिलता है)
इन दोनों के बीच का अंतर 5% है, जिसे मार्जिन ऑफ सेफ्टी कहा जा सकता है। इसका मतलब है कि स्टॉक निवेशक को बॉन्ड निवेश की तुलना में 5% अतिरिक्त रिटर्न मिल रहा है, जो उन्हें स्टॉक्स में निवेश करने के लिए अतिरिक्त जोखिम के रूप में मिलता है।
मार्जिन आफ सेफ्टी अधिकांश ग्रोथ स्टॉक पर कार्य नहीं करती है। क्योंकि यह बाजार इतना अधिक स्तर है कि वह खरीदार को उचित मार्जिन आफ सेफ्टी प्रदान नहीं कर सकता। ग्रोथ स्टॉक में कार्य करने के लिए दीघ्रकालिक सोच और विवेक की आवश्यकता होती है।
मार्जिन, निवेशक के पक्ष में होने पर भी सिक्योरिटी बुरे परिणाम दे सकती है क्योंकि मार्जिन केवल यही गारंटी देता है कि सिक्योरिटी में हानि से लाभ कमाने की संभावनाएं अधिक है, न कि हानि को असंभव बनती है, लेकिन ऐसे ही सिक्योरिटीज की संख्या बढ़ने लगती है तब लाभ की संभावना हानि से अधिक हो जाती है।
बुक कोट्स
1-भविष्य में शेयर से मिलने वाले रिटर्न की भविष्यवाणी करने से हम केवल एक चीज पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि शायद हम गलत साबित होंगे। अतीत हमें केवल एक ही बात सिखाता है कि भविष्य हमेशा हैरान कर देने वाला होता है।
2-जब मनुष्य किसी घटना की संभावना या निरंतरता का अनुमान लगाता है तो उसका आधार यह नहीं होता कि वह घटना कितनी बार हुई है बल्कि इस पर होता है कि पिछले उदाहरण में इसमें कितनी चमक रही है।
3-बांड को केवल इसकी यील्ड के लिए खरीदना वैसा ही है जैसे सिर्फ सेक्स के लिए विवाह करना। अगर हमें सर्वप्रथम आकर्षित करने वाली वस्तु से मोह समाप्त हो गया तो हम खुद से पूछते नजर आएंगे, तब इसका क्या प्रयोजन है। जब उत्तर होगा कि कुछ नहीं, तो जीवनसाथी और बांड से सामान रूप से दिल टूट जाता है।
4-एक बार 95% का नुकसान होने पर हमें 1900% मुनाफा कमाना होता है जिससे वहां पहुंच सके जहां से हमने शुरू किया था।
5-इंटेलीजेंट इन्वेस्टर बनने के लिए दिमाग से ज्यादा व्यक्तित्व महत्व रखता है।
6-हम बाजार के व्यवहार का अनुमान नहीं लगा सकते इसलिए हमें अपने व्यवहार का अनुमान लगाना और उसको नियंत्रित करना सीखना होगा।
7-जब इन्फ्लेशन बहुत कम हो जाती है या नेगेटिव हो जाती है तो स्टॉक बहुत खराब प्रदर्शन करते हैं, और जब इन्फ्लेशन सामान्य रहती है तब अधिकतर समय स्टॉक अच्छा प्रदर्शन करते हैं, और जब इन्फ्लेशन हाई हो जाती है तब स्टॉक अचानक से ऊपर और नीचे होते रहते हैं।
8-सामान्य तौर पर 10 से नीचे का पी रेशों कम माना जाता है, 10 से 20 के बीच का रेश्यो माध्यम माना जाता है और 20 या उससे अधिक रेश्यो महंगा माना जाता है।
9-वित्तीय जोखिम केवल वहां ही नहीं होता जहां हम सब उसे तलाशते हैं, अर्थव्यवस्था या अपने निवेश में बल्कि हमारे भीतर भी होता है।
10-"72" का नियम एक मानसिक उपकरण है। पैसे को 2 गुना करने में कितना समय लगेगा इस बात को कैलकुलेट करने के लिए इसकी अनुमानित ग्रोथ रेट को 72 से भाग देना है। उदाहरण के लिए 6% पर पैसा 12 साल में दोगुना हो जाएगा 72 को 6 से भाग करने पर 12।
11-निवेश शुरु करने वालों से आग्रह है कि वे अपनी मेहनत की कमाई को बाजार को मात देने के प्रयास में ना लगाये। पहले सिक्योरिटी के प्राइस को समझने का प्रयास करे और शुरुआत में अपने पैसे की बहुत छोटी मात्रा लगाये।
12-धनवान बनने के लिए अत्यधिक साहस के साथ काफी सावधानी की भी आवश्यकता होती है और जब हम यह हासिल कर लेते हैं तो इसे बनाये रखने के लिए 10 गुना बुद्धि चाहिए होती है।
13-इंटेलिजेंट इन्वेस्टर बड़े ग्रोथ स्टॉक में, तब रुचि नहीं लेते जब वे सबसे लोकप्रिय होते हैं बल्कि तब लेते हैं जब कुछ गलत हो जाए।
14-धन हानि इतनी कष्टकारी होती है कि कुछ लोग और नुकसान होने से भयभीत होकर न्यूनतम पर बेच देते हैं या और खरीदारी से इनकार कर देते है।
15-अगर हम वैवाहिक रहने को तैयार नहीं है तो विवाह न करें और निवेश भी ऐसा ही है। यदि हम किसी फंड को कम-से-कम तीन कमजोर वर्षों तक पकड़े रहने को तैयार न हो तो इसे न खरीदें।
16-यदि लोगों के निवेश का कारण धन कमाना है तो सलाह लेने का मतलब यह है कि वे दूसरों से धन कमाने का तरीका पूछ रहे हैं।
END