परिचय
"1 Percent Formula" बुक की सबसे अच्छी बात यह है कि बड़े-बड़े कार्य करने के सपने एक दिन में पूरे नहीं किए जा सकते हैं। अगर हम उन्हें एक साथ करने की कोशिश करते हैं, तो अधिक दर्द और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। कम दर्द और लंबे समय तक कार्य में टिके रहने के लिए हमें कार्य को 100% से घटाकर 1% में बाँटना सीखना होगा।
लेखक Thomas K Connellan द्वारा लिखित "1 Percent Formula" बुक सफलता के उस रहस्य को उजागर करती है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं, और जानने वालों में से भी बहुत कम लोग इसका सही से उपयोग कर पाते हैं। हम सफलता के लिए बहुत कुछ करते हैं, लेकिन सफलता बहुत कम लोगों की झोली में गिरती है। इसका मुख्य कारण है कि खुद और अपने कार्यों में हर दिन 1% सुधार करना और इसे तब तक जारी रखना जब तक सफलता न मिल जाए।
यह मुश्किल जरूर लगता है, लेकिन जिसे हम सफलता मानकर पाने की कोशिश करते हैं, असल में वह एक पड़ाव मात्र होता है। उसके आगे उससे भी बड़ी कठिनाइयाँ हमारा इंतज़ार कर रही होती हैं। इसलिए, यदि हममें 1% सुधार की आदत होती है, तो हमें बार-बार शुरू से प्रयास नहीं करना पड़ता है, और हम बहुत जल्दी अगले पड़ाव भी आसानी से पार कर लेते हैं।
समरी
कार्य से प्रेरणा बढ़ाना
हम अपने जीवन में कई ऐसे कार्य करते हैं, जिन्हें करने की हमें न तो इच्छा होती है और न ही प्रेरणा मिलती है। अक्सर ये कार्य हम अपने माता-पिता या किसी अन्य के कहने पर करते हैं, क्योंकि वे यह समझते हैं कि भविष्य में हमारे लिए क्या सही होगा।
प्रेरणा के बिना कोई भी कार्य बोझिल लगता है और इसे पूरा करना मुश्किल होता है। लेकिन जब हम कार्य को निरंतर करते हैं, तो हमें उसमें आनंद आने लगता है और हम खुद को उसमें प्रेरित महसूस करने लगते हैं।
कार्य से प्रेरणा बढ़ाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अपने कार्य को पूरा करने के लिए, हमें केवल प्रेरणा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती हैं। जिससे हम मूड के हिसाब से नहीं कार्य के अनुसार काम करने की कोशिश कर सकते हैं।
कार्य से प्रेरणा बढ़ाने के कुछ उपाय इस प्रकार हैं;
सही कार्य का चुनाव करना: हमें पहले यह तय करना होगा कि कौन-से कार्य हमारे लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और कौन-से केवल समय की बर्बादी करते हैं।
सही तरीके से कार्य करना: हम कार्य को सही प्रक्रिया और रणनीति के साथ करेंगे, तो प्रेरणा स्वाभाविक रूप से बढ़ती जाएगी।
छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना: किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे स्टेप्स लें। इससे हर छोटे प्रयास के बाद एक उपलब्धि का अहसास होगा, जो प्रेरणा को बनाए रखेगा।
निरंतर अभ्यास करना: जैसे-जैसे हम किसी कार्य को नियमित रूप से करने लगते हैं, वैसे-वैसे हमें उसमें आनंद आने लगता है। यही निरंतरता हमें प्रेरित रखती है और सफलता की ओर ले जाती है।
20% कार्य से 80% परिणाम
लेखक बताते हैं कि 20/80 का नियम (पारेटो सिद्धांत) यह बताता है कि किसी भी क्षेत्र में 20% प्रयास, 80% परिणाम उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए:
- दुनिया की 20% आबादी के पास 80% संपत्ति होती है।
- किसी भी कंपनी के 20% प्रोडक्ट्स, 80% इनकम लाते हैं।
- हमारे जीवन के 20% कार्य, हमारी 80% सफलता के लिए जिम्मेदार होते हैं।
20/80 के नियम को अपनाने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं;
सबसे महत्वपूर्ण 20% कार्यों की पहचान करना: हर दिन ऐसे छोटे कार्य खोजें, जो हमारे 80% परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। यह वे कार्य होते हैं जो हमें सबसे अधिक सफलता दिला सकते हैं।
छोटे लेकिन प्रभावी कार्यों पर ध्यान देना: कई बार ये कार्य बहुत छोटे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें लगातार करने से ही बड़ी सफलता मिलती है।
बेकार के 80% कार्यों को कम करना: हर वह गतिविधि जो हमें लक्ष्य में योगदान नहीं देती, उसे धीरे-धीरे कम करें ताकि हमारे पास महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अधिक समय हो।
निरंतर सुधार करना: समय-समय पर अपने कार्यों की समीक्षा करें और देखें कि कौन-से 20% कार्य हमें 80% रिजल्ट को प्रभावित कर रहे हैं, और उन्हीं पर फोकस बढ़ाएँ।
अभ्यास से कार्य में महारत
लेखक का मानना है कि किसी भी कौशल या कार्य में महारत (Mastery) जन्मजात नहीं मिलती है। जो भी व्यक्ति सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचता है, वह अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित होता है और उसमें 10,000 घंटे का अभ्यास करता है।
हम सभी कोई न कोई काम करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो सचेत रूप से खुद को बेहतर बनाने के लिए काम करते हैं। जो लोग ऐसा नहीं करते, वे अक्सर अपने काम को दोष देकर उसे छोड़ देते हैं और असफल हो जाते हैं।
सफलता प्राप्त करने के लिए हमें अपने काम को पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ सीखना होगा। रिसर्च के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 5 घंटे अपने काम को देता है, तो उसे 10,000 घंटे पूरे करने में लगभग 5 साल लगेंगे। यही वह समय है जिसमें कोई व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में महारत हासिल कर सकता है।
अभ्यास से कार्य में महारत हासिल करने के कुछ नियम प्रकार हैं;
1% फॉर्मूला अपनाना: हर दिन सिर्फ 1% सुधार करने का संकल्प लें। छोटे-छोटे बदलाव ही लंबे समय में बड़ी सफलता की ओर ले जाते हैं।
गैर-जरूरी कामों को छोड़ना: हमारे पास कई ऐसे काम होते हैं, जो हमारी सफलता में योगदान नहीं देते। ऐसे कामों को कम करके, हम अपने महत्वपूर्ण कौशल को निखारने के लिए अधिक समय निकाल सकते हैं।
सचेत होकर अभ्यास करें: केवल समय बिताना ही काफी नहीं है, बल्कि उस दौरान पूरी एकाग्रता और समर्पण के साथ काम करना जरूरी है। जब हम सचेत रूप से 10,000 घंटे अभ्यास करते हैं, तो हम अपने क्षेत्र में शीर्ष पर पहुँच सकते हैं।
30 दिनों का फार्मूला
हमारा दिमाग हर नए काम के लिए नए न्यूरल कनेक्शन या संयोजन बनाता है। लेकिन इन संयोजनों को स्थायी बनाने के लिए हमें कार्य को बार-बार दोहराना पड़ता है।
30 दिनों का फ़ॉर्मूला यह बताता है कि अगर हम किसी आदत को लगातार 30 दिनों तक अपनाते हैं, तो वह आदत हमारे दिमाग में मजबूत हो जाती है और उसे बनाए रखना आसान हो जाता है।
आदतें हमारे जीवन को आकार देती हैं, लेकिन कोई भी नई आदत आसानी से नहीं बनती। जब हम कोई नई आदत अपनाते हैं, तो शुरुआत में उसे बनाए रखना मुश्किल होता है। लेकिन जब हम उसे लगातार 30 दिनों तक दोहराते हैं, तो हमारा दिमाग उसके लिए एक स्थायी कनेक्शन बना लेता है।
30 दिनों का फार्मूला हम कुछ इस प्रकार उपयोग कर सकते है;
एक स्पष्ट आदत चुनना: सबसे पहले यह तय करें कि कौन-सी आदत को विकसित करना है। एक समय में एक ही आदत पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर है।
छोटे-छोटे स्टेप्स लेना: आदत को अपनाने के लिए शुरुआत छोटे-छोटे बदलावों से करें। उदाहरण के लिए, अगर हम रोज़ व्यायाम करना चाहते हैं, तो पहले दिन केवल 5 मिनट करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।
नियमित अभ्यास करना: किसी भी आदत को बनाए रखने के लिए रोज़ाना इसे दोहराएँ। बीच में ब्रेक लेने से कनेक्शन कमजोर हो सकता है।
विचारों पर नियंत्रण रखना: हमारे नकारात्मक विचार और पुराने विश्वास हमें आदत बनाने से रोक सकते हैं। इसलिए यह पहचानें कि कौन-से विचार हमें पीछे खींच रहे हैं और उन्हें छोड़ने का प्रयास करें।
निष्क्रियता की शक्ति
अक्सर हमें ऐसा लगता है कि जितनी अधिक मेहनत करेंगे, सफलता की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कभी-कभी जरूरत से ज्यादा मेहनत करने से हम अपनी सेहत को नज़रअंदाज कर देते हैं, जिससे हमारी उत्पादकता और सफलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हमारा मस्तिष्क लगातार 90 मिनट तक ही ध्यान केंद्रित कर सकता है, इसके बाद कार्यक्षमता कम होने लगती है। इसलिए, हर 90 मिनट के बाद 20 मिनट का ब्रेक लेना जरूरी है ताकि हम दोबारा पूरी ऊर्जा के साथ काम कर सकें।
अगर हमारी नींद पूरी नहीं होती, तो दिनभर सुस्ती बनी रहती है और हमारा काम प्रभावित होता है। इसके अलावा, बार-बार थकान महसूस होने के कारण हम दिन के समय नींद के बहाने ढूंढते रहते हैं, जिससे हमारी उत्पादकता और कार्यक्षमता कम हो जाती है।
निष्क्रियता की शक्ति हम कुछ इस प्रकार अपना सकते है;
काम और ब्रेक का सही संतुलन बनाना: 90 मिनट का फोकस + 20 मिनट का ब्रेक इस नियम को अपनाएँ, जिससे हम लंबे समय तक ऊर्जावान और उत्पादक बने रहेंगे।
भरपूर नींद लेना: अपनी सेहत और दिमागी शांति के लिए कम से कम 8 घंटे की नींद को प्राथमिकता दें।
आराम और छुट्टी को ज़रूरी समझना: कभी-कभी ब्रेक लेना या छुट्टी पर जाना हमें मानसिक और शारीरिक रूप से रिचार्ज कर सकता है, जिससे हमारी कार्यक्षमता और रचनात्मकता बढ़ती है।
बिना अपराधबोध के आराम करना: आराम करना आलस्य नहीं है, बल्कि यह हमें लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने में मदद करता है।
बुक कोट्स
"हम हर व्यक्ति से 100 प्रतिशत बेहतर नहीं बन सकते, लेकिन हम सैकड़ों चीजों में एक प्रतिशत बेहतर बन सकते हैं।"
"हर कोई महान नहीं बन सकता, लेकिन हर कोई इस समय जहां भी है, उससे बेहतर जरूर बन सकता है।"
"हम सारे समय नहीं जीत सकते, लेकिन अगर हम आज किसी चीज को कल से बेहतर करते हैं, तो हमारे पास एक विजेता का दिल हमेशा होगा।"
"ओलंपिक के आदर्श वाक्य 'सबसे तेज, सबसे ऊंचा, सबसे शक्तिशाली' नहीं है; बल्कि 'ज्यादा तेज, ज्यादा ऊंचा, ज्यादा शक्तिशाली' होना है।"
"हम किसी कार्य को जितना करते हैं, हम उसे करने के लिए उतने ही ज्यादा प्रेरित होते हैं। इसलिए, अगर हम ज्यादा कार्य करेंगे, तो हमें ज्यादा प्रेरणा मिलेगी।"
"उस कार्य को अच्छी तरह करने का कोई मतलब नहीं जिसे हमें बिल्कुल नहीं करना है।"
"हम जो भी कार्य करते हैं, उसमें छोटा सा सही परिवर्तन हमारे लगाए प्रयास की तुलना में ज्यादा बड़े परिणाम देता है।"
"20 प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत दौलत के स्वामी होते हैं।"
"30 साल के अनुभव वाले बहुत से लोगों के पास दरअसल 30 साल का अनुभव नहीं होता। उनके पास तो एक साल का अनुभव होता है जिसे 30 बार दोहराया गया है।"
"अपनी तुलना खुद से करना ज्यादा उपयोगी होता है। सबसे ज्यादा मायने यही रखता है कि आप अपने वर्तमान स्वरूप से 1 प्रतिशत बेहतर बन जाएं।"
"किसी सकारात्मक आदत को डालने या किसी नकारात्मक आदत को छोड़ने के लिए कम से कम 21 दिनों के लगातार प्रयास की जरूरत होती है।"
"जो लोग बदलने में सफल हुए, वे शुरुआत में फिसलते हैं।"
"बेहतरी का कोई शॉर्टकट नहीं होता है।"
निष्कर्ष
1 Percent Formula बुक समरी में हमने पांच महत्पूर्ण बातें सीखी, जो इस प्रकार है;
- जैसे प्रेणना से कार्य होता है ठीक इसके विपरीत हम कार्य से प्रेणना भी बढ़ा सकते हैं।
- सफलता के लिए हमें 20% कार्यों पर ध्यान देना होता है जो 80% परिणाम देते हो।
- किसी काम में शीर्ष तक पहुंचने के लिए उस काम में 10,000 घंटे की मेहनत करनी पड़ती हैं।
- अपनी नई आदत से connection बनाने के लिए, हमें नई आदत को 30 दिन तक फॉलो करना होता है।
- कभी-कभी सफलता के लिए कुछ न करना जरुरी होता है।