Think And Grow Rich Book Six Basic Fears Hindi

कोई कहता है कि उसे किसी चीज से डर नहीं लगता है, तो इसका मतलब है वह खुद से सच बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है या वह नहीं जनता की उसे किस चीज से डर लगता है। सच यह है कभी-कभी हम अपनी ही चीजों को देखकर डर जाते है।

हम सभी में डर एक सामान्य भावना है, जो हमें बेहतर बनने, गलत कार्य करने से रोकने, और अपनी सुरक्षा करने की ओर ले जाती है। यह एक ऐसी भावना है जिसे समाप्त नहीं किया जा सकता, केवल मैनेज किया जा सकता है।

तो हमें किस प्रकार के डर को मैनेज करना होता है यह भी एक सवाल है और जिसका जवाब जानना डर को मैनेज करने के लिए जरुरी है। हमें उन डर को मैनेज करने की आवश्यकता है जो हमें, समाज में रहने, मेल-जोल करने, अपने कार्यों में बने रहने, और पूर्वाग्रह नियमों को तोड़ने से रोकते है।

इन छह डर को मैनेज करने के लिए, किसी कार्य में बार-बार दोहराव, थोड़ी बहुत लापरवाही, खुद पर विश्वास और थोड़ा बहुत अपने विचारों या शब्दो के साथ हेर-फेर मदद कर सकता है। (Note:- यह पोस्ट लेखक Napoleon Hill द्वारा लिखित Think and Grow Rich बुक का ही एक हिस्सा है।)





गरीबी का डर

गरीबी का डर 6 बुनियादी डरों में सबसे विनाशकारी है। इसे सूची में सबसे ऊपर रखा गया है, क्योंकि इस पर महारत हासिल करना सबसे कठिन है। इस डर की उत्पत्ति के बारे में बताने के लिए काफी अधिक साहस की आवश्यकता होती है, और बता देने के बाद इसे स्वीकार करने में और भी ज्यादा साहस की।

गरीबी के डर के लक्षण

संदेह: आमतौर पर विफलताओं को छुपाने के लिए, स्पष्टीकरण देने के लिए, माफी मांगने के लिए बनाए गए बहाने और टालमटोल के रवैये द्वारा व्यक्त किया जाता है।

चिंता: आमतौर पर दूसरों की गलती निकालने, पैसे अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति, शराब पीने और कभी-कभी नशीले पदार्थों के उपयोग में असंयम और आत्मनिर्भरता की कमी के द्वारा व्यक्त की जाती है।

अति-सावधानी: सफल होने के साधन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय संभावित विफलता के बारे में सोचते और बात करते हुए, हर परिस्थिति के नकारात्मक पक्ष को देखने की आदत के द्वारा व्यक्त की जाती है।

अमीरी की मांग के बजाय गरीबी की उम्मीद करना: अमीरी की मांग और उसे प्राप्त करने वाले लोगों से संबंध की तलाश करने के बजाय, गरीबी को स्वीकार करने वाले लोगों के साथ संबंध बनाने के द्वारा व्यक्त की जाती है।

गरीबी के डर का मैनेजमेंट

अज्ञानता से ज्ञान के ओर; गरीबी से अमीरी की ओर जाने के लिए हमें यह पता करना है कि हमें किस ज्ञान की आवश्यकता है और किसकी नहीं?

संदेह से कार्य और विश्वास की ओर; किसी कार्य के परिणाम में दो ही रिजल्ट होते है या तो पूरा होगा या नहीं, हमें बस कार्य को पूरा करना है।

संगति; अमीर इसलिए अमीर होता जाता है क्योंकि उसके आस-पास अमीर लोग होते है जिनसे वह अमीर होने की चीजें सीखता रहता है। और ऐसा ही गरीबी के साथ भी होता है। यह भी सच है कोई अमीर व्यक्ति हमसे दोस्ती नहीं करेगा क्योंकि मानसिकता का मेल नहीं होता है इसलिए अपनी सोच को अमीर बनाना होगा।


आलोचना का डर

यह वही डर है जिससे अधिकतर लोग ग्रस्त होते हैं। इसके कारण लोग अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं। कभी-कभी हम बहुत अच्छा काम कर रहे होते हैं लेकिन एक आलोचना से पूरा काम बर्बाद कर लेते हैं। इसलिए इस डर के लक्षण जानना बहुत जरूरी है।

आलोचना के डर के लक्षण

आत्म-चेतना: आमतौर पर बातचीत में घबराहट, और अजनबियों से मिलने पर हाथ और पैर की अजीब गतिविधि, नजरें चुराना आदि में व्यक्त की जाती है।

संतुलन की कमी: आवाज के नियंत्रण में कमी, दूसरों की उपस्थिति में घबराहट, शरीर की खराब मुद्रा, कमजोर स्मृति के माध्यम से व्यक्त होती है।

व्यक्तित्व: व्यक्तिगत आकर्षण और राय व्यक्त करने की क्षमता की कमी, मुद्दों का सामना करने के बजाय उनसे बचने की आदत, दूसरों की राय की सावधानी से जांच किए बिना उनके साथ सहमत हो जाने के द्वारा व्यक्त होता है।

अपव्यय: दूसरों के साथ बराबरी रखने की कोशिश की आदत, अपनी आय से परे खर्च, पहल करने की शक्ति की कमी, और विचारों को व्यक्त करने में डर के द्वारा व्यक्त होता है।

आलोचना के डर का मैनेजमेंट

चेतना का भाव; हम हर इंसान से बात कर सकते है, चाहे वह कितने भी बड़े या छोटे पद पर क्यों न हो। और यह सोचकर मिले कि वह भी इंसान है और मैं भी।

थोड़ी लापरवाही; सभी काम खुद करने की कोशिश नहीं करनी है कुछ काम दूसरों के लिए भी छोड़ने होते है। लापरवाही हमें आलोचनाओं को सुनने और उस पर प्रतिक्रिया न देने के लिए तैयार करती है।

स्वीकार करना; हर किसी के बराबरी करने की कोशिश करने के बजाये खुद को बेहतर करना ज्यादा उपयोगी है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमारी मानसिकता अलग-अलग सोच और धारणा से मिलकर बनी है जिसके अनुसार हम कार्य करते है।


खराब सेहत का डर

इंसान खराब सेहत से उन भयानक तस्वीरों के कारण डरता है जो उसके मन में रोपित की गई है। खराब सेहत आर्थिक हानि लाती है। इसलिए यह डर गरीबी के डर से जुड़ा हुआ है।

खराब स्वास्थ्य के डर के लक्षण

आत्म-सुझाव: सभी रोग के लक्षण खोजने की उम्मीद करते हुए आत्म-सुझाव का नकारात्मक उपयोग की आदत के द्वारा व्यक्त किया जाता है।

संवेदनशीलता: खराब स्वास्थ्य का डर, शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को तोड़ देता है, और एक ऐसी अनुकूल स्थिति पैदा करता है, जिसमें व्यक्ति बीमारी के किसी भी रूप के संपर्क में आते ही बीमार हो जाता है।

असंयम: सिरदर्द, नसों के दर्द आदि जैसे दर्द नष्ट करने के लिए, कारण मिटाने के बजाय, शराब या नशीले पदार्थों के उपयोग की आदत द्वारा व्यक्त होता है।

खराब स्वास्थ्य के डर का मैनेजमेंट

सकारात्मक आत्म सुझाव; हम बीमार व्यक्ति को ओर अधिक बीमार करने की कोशिश नहीं करते बल्कि स्वस्थ करने की कोशिश करते है। यही हमें खुद के साथ भी करना है।

स्वास्थ्य की कद्र करना; हम स्वस्थ है तो इसका मतलब यह नहीं है हम कुछ भी खाते या पीते रहे। स्वस्थ शरीर जितनी मुश्किल से मिलता है उतनी ही जल्दी यह छीन भी लिया जाता है।

एक घंटा खुद को देना; प्रतिदिन कार्य होते है और शरीर का उपयोग भी। इसलिए हमें खुद को कुछ समय देना सीखना होगा जिसमे हम नाच सके, शाररिक व्यायम कर सके, जोर-जोर से गाने गा सके और छोटे बच्चो की तरह खेल सकें।


किसी के प्यार को खोने का डर

ईर्ष्या और इसी प्रकार के अन्य पागलपन, किसी के प्यार को खोने के डर से पैदा होते हैं। यह डर 6 बुनियादी डरो में सबसे दर्दनाक है। क्योंकि यह अक्सर स्थायी पागलपन की ओर ले जाता है, इसलिए यह किसी भी अन्य बुनियादी डर की तुलना में शरीर और मस्तिष्क पर अधिक कहर ढाता है।

प्यार के खोने के डर के लक्षण

ईर्ष्या: पर्याप्त आधार के बिना पत्नी या पति पर बेवफाई का आरोप लगाने की आदत के द्वारा व्यक्त होती है।

गलती खोजना: थोड़ी-सी उत्तेजना पर या किसी भी कारण के बिना दोस्तों, रिश्तेदारों, व्यापार के सहयोगियों और परिजनों की गलती निकालने की आदत के द्वारा व्यक्त होती है।

जुआ: प्यार खरीदा जा सकता है, के विश्वास के साथ प्रियजनों को धन उपलब्ध कराने के लिए जुए, चोरी, धोखाखड़ी और अन्य खतरनाक जोखिम लेने की आदत के द्वारा व्यक्त होता है।

प्यार के खोने के डर का मैनेजमेंट

ज्ञान; हमें यह याद रखना चाहिए कि हर व्यक्ति की अपनी एक स्वतंत्र सोच होती है जिसके अनुसार वह कार्य करता है। यह जरुरी है कि यह एक दूसरे पर हावी न हो।

अनुभव; हम अपनी आदतों से परेशान है तो हम दूसरों से यह उम्मीद क्यों करते है कि वह हमारी आदतों से खुश होगा। अच्छा है हम खुद प्यार करना सीखें।

विश्वास; हम किसी परवाह करते है उसे अपना मानते है और उसकी जगह खुद को रखकर देख पाते है। तो हमे किसी से प्यार पाने के लिए प्रतियोगिता करने की आवश्यकता नहीं होती है।


बुढ़ापे का डर

आदमी के पास इस डर के तीन बहुत ही ठोस कारण है।

  1. अपने साथी लोगों पर अविश्वास, जो उनकी उन सभी सांसारिक चीजों को छीन सकते हैं जिसका वह अधिकारी है।
  2. समाज में हो रही घटनाएं भी इस डर में योगदान देती है।
  3. स्वतंत्रता की हानि की संभावना, क्योंकि बुढ़ापे के द्वारा शारीरिक और आर्थिक दोनों में ही स्वतंत्रता की कमी लाने की संभावना होती है।

बुढ़ापे के डर के लक्षण

झूठा विश्वास: 40 की उम्र के आसपास जब मानसिक maturity की उम्र होती है, तब यह झूठा विश्वास करना कि उम्र के कारण वह फिसल रहा है। धीमा होने और एक हीन भावना विकसित करने की प्रवृत्ति के द्वारा व्यक्त होता है।

उम्र से छोटा दिखना: 40 वर्ष की महिला या पुरुष युवाओं के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए, अपनी उम्र से छोटा दिखने की कोशिश के द्वारा व्यक्त होता है।

बुढ़ापे के डर का मैनेजमेंट

बदलाव को स्वीकार करना; समय बदलने के साथ हमारा सोचने का तरीका और परिस्थितियाँ दोनों बदल जाती है। हमें परिस्थितियों के अनुसार बदलना और नए तरीके से कार्य करना सीखना होगा। यह मुश्किल है पर सीखा जा सकता है।

अनुभव; अनुभव परिस्थितियों को हल करने से बनता है, जो हमें औरों से बेहतर बनाता है। जो जीवन हम जीते है उसमें ऐसी अनेक परिस्थितियाँ है जो बार-बार किसी-न-किसी में रूप आती रहती है, जिन्हें हल करना हम औरों को सीखा सकते है।


मौत का डर

यह डर बेकार है। मौत आएगी कोई इसके बारे में क्या सोचता है, कुछ फर्क नहीं पड़ता। एक आवश्यकता के रूप में इसे स्वीकार करना होगा और अपने दिमाग से बाहर भेज देना है। यह एक आवश्यकता होगी, वरना यह सब के पास नहीं आती। शायद यह उतनी बुरी नहीं है जितनी इसकी कल्पना की गई है।

मृत्यु के डर के लक्षण

जीवन में शिथिलता: आमतौर पर उद्देश्य या एक उपयुक्त व्यवसाय की कमी के कारण, जीवन का भरपूर उपयोग करने के बजाय मरने के बारे में सोचने की आदत के द्वारा व्यक्त होता है।

आम-कारण: मौत के डर के सबसे आम कारण है-खराब स्वास्थ्य, गरीबी, उचित व्यवसाय की कमी, प्यार में निराशा, पागलपन और धार्मिक कट्टरता।

मृत्यु के डर का मैनेजमेंट

सोच; प्रतिदिन सुबह उठकर यह सोचना की मैं अभी भी जीवित हूँ, और आज अपने जीवन को और बेहतर कर सकता हूँ। यह सोच मृत्यु के डर को कम और जीवन जीने की ओर ले जाती है।

गर्व; एक ऐसे जीवन को जीना जो हमसे कभी भी छीन सकता है, और ऐसे जीवन को सालों तक जीना गर्व की बात होती है।



निष्कर्ष

इस समरी में हमने छह बुनियादी डर को जाना इस प्रकार थे;

  1. गरीबी का डर सबसे विनाशकारी है। क्योंकि इसे बताने और स्वीकार करने के लिए अधिक साहस की आवश्यकता होती है।
  2. आलोचना के डर के कारण लोग अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं।
  3. खराब स्वाथ्य का डर, हमारी बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है।
  4. ईर्ष्या और इसी प्रकार के अन्य पागलपन, किसी के प्यार को खोने के डर से पैदा होते हैं।
  5. बुढ़ापे का डर स्वतंत्रता और हीन भावनाओं के कारण विकसित होता है।
  6. मौत का डर बेकार है। मौत आएगी कोई इसके बारे में क्या सोचता है, कुछ फर्क नहीं पड़ता।

END

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